नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी के फेसबुक पेज को निलंबित किए जाने के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और मेटा प्लेटफॉर्म्स से जवाब मांगा है। याचिका में इसे अभिव्यक्ति की आजादी का हनन बताया गया है।
- दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और मेटा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
- NC सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी का फेसबुक पेज मार्च से प्रतिबंधित है।
- याचिका में तर्क दिया गया है कि बिना कारण बताए पूरे पेज को ब्लॉक करना असंवैधानिक है।
नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी द्वारा दायर एक याचिका पर संज्ञान लिया। यह याचिका उनके आधिकारिक फेसबुक पेज के निलंबन को चुनौती देने के लिए दायर की गई थी। जस्टिस स्वरणा कांता शर्मा ने इस मामले में सूचना और प्रसारण मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और मेटा प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है।
सुनवाई के दौरान, अदालत ने मामले को 30 सितंबर के लिए निर्धारित किया। हालांकि, न्यायाधीश ने इस स्तर पर किसी भी अंतरिम राहत से इनकार कर दिया, यह देखते हुए कि विपक्षी दलों को सुने बिना कोई भी आदेश पारित नहीं किया जा सकता। मेटा के वकील ने अदालत को सूचित किया कि सांसद का फेसबुक पेज एक कानून प्रवर्तन एजेंसी (Law Enforcement Agency) द्वारा जारी नोटिस के बाद हटाया गया था।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला डिजिटल युग में 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' और 'सरकारी नियंत्रण' के बीच के संघर्ष को दर्शाता है। जब किसी निर्वाचित प्रतिनिधि के सोशल मीडिया हैंडल को ब्लॉक किया जाता है, तो यह न केवल व्यक्ति के अधिकार बल्कि उनके निर्वाचन क्षेत्र के हजारों नागरिकों के सूचना प्राप्त करने के अधिकार को भी प्रभावित करता है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स द्वारा सरकारी आदेशों का पालन करना कानूनी आवश्यकता है, लेकिन बिना किसी विशिष्ट सामग्री को चिन्हित किए पूरे अकाउंट को ब्लॉक करना अनुच्छेद 19(2) का उल्लंघन हो सकता है।
याचिका में कहा गया है कि 'रुहुल्लाह मेहदी' नामक फेसबुक पेज का उपयोग जनता के साथ संवाद करने और लोकतांत्रिक चर्चाओं में भाग लेने के लिए किया जाता है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि मेटा ने उन्हें अपनी बात रखने का कोई मौका नहीं दिया और न ही निलंबन के विस्तृत कारण बताए।
कानूनी तर्कों में यह स्पष्ट किया गया कि सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम के तहत विशिष्ट अवैध सामग्री को हटाने का प्रावधान है, लेकिन पूरे पेज पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना कानून द्वारा अधिकृत नहीं है। यह कदम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत निर्धारित सीमाओं का उल्लंघन माना गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. सांसद मेहदी ने अदालत से क्या मांग की है?
उन्होंने अपने फेसबुक पेज के निलंबन को चुनौती दी है और इसे बहाल करने की मांग की है क्योंकि यह उनके पेशेवर जुड़ाव का मुख्य माध्यम है।
2. मेटा ने पेज हटाने का क्या कारण बताया?
मेटा के वकील ने अदालत में कहा कि पेज को एक कानून प्रवर्तन एजेंसी से प्राप्त आधिकारिक नोटिस के आधार पर हटाया गया था।