भारत ने सिंधु जल संधि को बहाल करने और कश्मीर में जलविद्युत परियोजनाओं को सीमित करने के अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत के सुझाव को सिरे से खारिज कर दिया है। यह तनाव अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले के बाद से चरम पर है।

  • भारत ने सिंधु जल संधि को बहाल करने के सुझाव को खारिज किया।
  • स्थायी मध्यस्थता अदालत (PCA) ने भारत को संधि पालन की सलाह दी थी।
  • पहलगाम हमले के बाद भारत ने संधि को एकतरफा स्थगित किया था।
  • कश्मीर में जलविद्युत संयंत्रों के निर्माण पर विवाद जारी है।

भारत और पाकिस्तान के बीच जल बंटवारे को लेकर दशकों पुराना विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता अदालत (Permanent Court of Arbitration - PCA) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत को पाकिस्तान के साथ 65 साल पुरानी सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) का पालन करना चाहिए। अदालत ने सुझाव दिया कि भारत को कश्मीर क्षेत्र में अपने जलविद्युत संयंत्रों के काम को सीमित करना चाहिए ताकि जल प्रवाह सुनिश्चित हो सके।

हालांकि, भारत सरकार ने इस सुझाव को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। भारत का यह कड़ा रुख अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम हमले के बाद आया, जिसके बाद भारत ने इस संधि को एकतरफा तौर पर स्थगित करने का निर्णय लिया था। नई दिल्ली का स्पष्ट मानना है कि आतंकवाद और जल सहयोग एक साथ नहीं चल सकते।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केवल पानी के बंटवारे का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता का है। भारत अब 'रणनीतिक जल प्रबंधन' की नीति अपना रहा है, जहां वह अपनी जल संपदा का उपयोग अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए करना चाहता है, जबकि पाकिस्तान इसे अपनी जल सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में देखता है।

"सिंधु जल संधि का भविष्य अब कानूनी बहसों से अधिक राजनीतिक इच्छाशक्ति और सीमा पार आतंकवाद के खात्मे पर निर्भर करता है।"

ऐतिहासिक रूप से, 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हस्ताक्षरित यह संधि दुनिया की सबसे सफल जल संधियों में से एक मानी जाती रही है। इसके तहत सिंधु, झेलम और चेनाब नदियों का नियंत्रण मुख्य रूप से पाकिस्तान को दिया गया था, जबकि रावी, ब्यास और सतलज पर भारत का अधिकार था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में, विशेष रूप से आतंकी हमलों के बाद, भारत ने इस संधि की समीक्षा करने की बात कही है।

पाकिस्तान ने कई मौकों पर इस संधि को बहाल करने की मांग की है, क्योंकि वह अपनी कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए इन नदियों पर अत्यधिक निर्भर है। लेकिन भारत का तर्क है कि जब तक सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद बंद नहीं होता, तब तक किसी भी प्रकार का द्विपक्षीय सहयोग संभव नहीं है।

Did You Know?: सिंधु जल संधि 1960 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अय्यूब खान के बीच हस्ताक्षरित हुई थी।
विशेषता भारत का रुख पाकिस्तान का रुख
संधि की स्थिति पहलगाम हमले के बाद स्थगित तत्काल बहाली की मांग
जलविद्युत परियोजनाएं ऊर्जा सुरक्षा के लिए आवश्यक पानी की चोरी का आरोप
मुख्य शर्त आतंकवाद का अंत अनिवार्य कानूनी बाध्यता का हवाला

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: सिंधु जल संधि क्या है?
यह 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई एक संधि है जो सिंधु नदी प्रणाली के पानी के बंटवारे को नियंत्रित करती है।

प्रश्न 2: भारत ने इसे स्थगित क्यों किया?
अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सुरक्षा कारणों से इस संधि को स्थगित कर दिया।