दिल्ली पुलिस ने CJP प्रदर्शनों से जुड़ी 13 FIR को रद्द करने की मांग की है, जबकि 2,873 गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों के खिलाफ नई कार्रवाई की अनुमति मांगी है।

  • दिल्ली पुलिस ने 20-25 जुलाई के CJP प्रदर्शनों से संबंधित 13 FIR रद्द करने की अपील की है।
  • पुलिस ने 2,873 'गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि' वाले लोगों पर नई FIR दर्ज करने की अनुमति मांगी है।
  • सुप्रीम कोर्ट 1 सितंबर को NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी केंद्र की याचिका पर सुनवाई करेगा।

नई दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस ने एक महत्वपूर्ण आवेदन दाखिल किया है। पुलिस ने 20 से 25 जुलाई के बीच हुए CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) प्रदर्शनों के दौरान दर्ज की गई 13 प्रथम सूचना रिपोर्टों (FIR) को रद्द करने की मांग की है। यह कदम 25 जुलाई को केंद्र सरकार द्वारा लिए गए एक निर्णय के बाद उठाया गया है।

हालांकि, यह राहत सभी के लिए नहीं है। दिल्ली पुलिस ने अदालत से उन 2,873 व्यक्तियों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने की विशेष अनुमति मांगी है, जिनकी पहचान 'गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि' वाले लोगों के रूप में की गई है। पुलिस का तर्क है कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के 3 अगस्त के उस आदेश के अनुरूप होगी, जिसमें 'क्रिमिनल एंटिसिडेंट्स' (आपराधिक पूर्ववृत्त) की व्याख्या स्पष्ट की गई थी।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि पुलिस की यह रणनीति एक 'सफाई अभियान' की तरह है। एक तरफ मामूली प्रदर्शनकारियों को कानूनी झंझटों से मुक्त कर सरकार अपनी छवि सुधारना चाहती है, वहीं दूसरी ओर पेशेवर अपराधियों को अलग कर उन्हें निशाना बनाने की तैयारी है। यह कानूनी पैंतरा भविष्य के विरोध प्रदर्शनों के लिए एक मिसाल बन सकता है।

"कानूनी तौर पर, FIR रद्द करना और चुनिंदा लोगों पर नई FIR दर्ज करना, राज्य की उस शक्ति को दर्शाता है जहाँ वह तय करता है कि कौन 'सच्चा प्रदर्शनकारी' है और कौन 'अपराधी'।"

इस मामले का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन हैं। केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 142 का उपयोग करते हुए छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कराने के लिए याचिका दायर की है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और उनकी पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुरोध पर इस मामले को 1 सितंबर को सूचीबद्ध करने का निर्णय लिया है।

ऐतिहासिक रूप से, जंतर-मंतर दिल्ली के विरोध प्रदर्शनों का केंद्र रहा है। 20 जून को शुरू हुआ यह आंदोलन NEET अनियमितताओं के खिलाफ देशभर में फैल गया था। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं, जिसमें लाठीचार्ज और आंसू गैस का व्यापक प्रयोग किया गया था।

गौरतलब है कि इस पूरे विवाद की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। इस समिति का मुख्य कार्य पुलिस द्वारा छात्रों के खिलाफ की गई कथित ज्यादतियों की जांच करना था।

क्या आप जानते हैं?: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को 'पूर्ण न्याय' सुनिश्चित करने के लिए कोई भी आदेश पारित करने की विशेष शक्ति देता है, जिसका उपयोग केंद्र अब NEET मामले में कर रहा है।

मामलों की तुलना

विवरणCJP प्रदर्शन मामलाNEET छात्र मामला
पुलिस की मांग13 FIR रद्द, 2873 पर नई FIRसभी छात्रों की FIR रद्द करना
मुख्य आधारआपराधिक पृष्ठभूमि की छंटनीपूर्ण न्याय (अनुच्छेद 142)
वर्तमान स्थितिसुप्रीम कोर्ट में आवेदन1 सितंबर को सुनवाई तय

Frequently Asked Questions

1. दिल्ली पुलिस ने 13 FIR रद्द करने की मांग क्यों की?
पुलिस ने यह मांग 25 जुलाई को केंद्र सरकार के निर्णय और सुप्रीम कोर्ट के 'क्रिमिनल एंटिसिडेंट्स' संबंधी स्पष्टीकरण के आधार पर की है।

2. NEET मामले में केंद्र सरकार क्या चाहती है?
केंद्र सरकार अनुच्छेद 142 का उपयोग कर प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR को पूरी तरह रद्द कराना चाहती है।