कर्नाटक पर्यटन विभाग ने राज्य के ऐतिहासिक स्मारकों और सांस्कृतिक संपत्तियों के व्यवस्थित संरक्षण के लिए 'कर्नाटक हेरिटेज एंड कल्चरल फाउंडेशन' (KHCF) की स्थापना का प्रस्ताव दिया है। यह पहल निजी क्षेत्र और जनता को संरक्षण कार्यों में शामिल करने का एक मंच प्रदान करेगी।

  • कर्नाटक हेरिटेज एंड कल्चरल फाउंडेशन (KHCF) की स्थापना का प्रस्ताव।
  • राज्य के लगभग एक लाख ऐतिहासिक स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों की पहचान की गई।
  • कॉर्पोरेट CSR, एनआरआई और सार्वजनिक दान के माध्यम से वित्तपोषण का लक्ष्य।
  • स्मारकों को 'गोद लेने' (Adopt a Monument) की पहल को और मजबूत करना।

बेंगलुरु: कर्नाटक की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, राज्य पर्यटन विभाग ने 'कर्नाटक हेरिटेज एंड कल्चरल फाउंडेशन' (KHCF) की स्थापना का प्रस्ताव दिया है। इस नई संस्था का मुख्य उद्देश्य राज्य के ऐतिहासिक स्मारकों, पुरातात्विक स्थलों, संग्रहालयों और सांस्कृतिक संपत्तियों का व्यवस्थित रूप से संरक्षण करना और कर्नाटक की कला एवं संस्कृति को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देना है।

पर्यटन मंत्री के.जे. जॉर्ज ने जानकारी दी कि पुरातत्व, संग्रहालय और विरासत विभाग द्वारा तैयार किया गया यह प्रस्ताव जल्द ही राज्य कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। यह प्रस्ताव राज्य की मौजूदा 'स्मारक गोद लें' (Adopt a Monument) पहल की सफलता को देखते हुए तैयार किया गया है, ताकि सरकार, निजी क्षेत्र और आम जनता के बीच एक सुव्यवस्थित सहयोग तंत्र विकसित किया जा सके।

विरासत का विशाल पैमाना

कर्नाटक के 239 तालुकों में किए गए एक व्यापक सर्वेक्षण के अनुसार, राज्य में लगभग एक लाख ऐतिहासिक स्मारक और पुरातात्विक स्थल मौजूद हैं। इतने बड़े पैमाने की विरासत को देखते हुए, पर्यटन मंत्री ने स्वीकार किया कि इनके दीर्घकालिक और टिकाऊ संरक्षण के लिए एक मजबूत वित्तीय तंत्र की आवश्यकता है। KHCF इसी कमी को पूरा करने के लिए एक सेतु का काम करेगा।

विरासत का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के साथ साझा जिम्मेदारी होनी चाहिए।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह की स्वायत्त फाउंडेशन का गठन कर्नाटक के पर्यटन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। वर्तमान में, सरकारी बजट पर अत्यधिक निर्भरता के कारण कई छोटे लेकिन महत्वपूर्ण स्थल उपेक्षा का शिकार हो जाते हैं। KHCF के माध्यम से, कॉर्पोरेट जगत के CSR (कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) फंड, प्रवासी भारतीयों (NRIs) का योगदान और सार्वजनिक दान को एक पारदर्शी माध्यम से स्मारकों के जीर्णोद्धार में लगाया जा सकेगा।

पर्यटन विभाग के सचिव वी. राम प्रसाद मनोहर ने जोर देकर कहा कि यह फाउंडेशन वित्तीय प्रबंधन, लेखांकन और ऑडिटिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करेगा। यह सुनिश्चित करेगा कि दान में मिला एक-एक पैसा सीधे ऐतिहासिक स्थलों के विकास और बुनियादी ढांचे में सुधार पर खर्च हो।

युवा पीढ़ी का जुड़ाव और भविष्य

KHCF केवल निर्माण और मरम्मत तक सीमित नहीं रहेगा। इसका एक प्रमुख लक्ष्य नई पीढ़ी को उनकी जड़ों से जोड़ना है। विभाग ऐसे कार्यक्रम तैयार करने की योजना बना रहा है जिससे युवा छात्र अपनी विरासत को केवल पाठ्यपुस्तकों में न पढ़ें, बल्कि सीधे स्मारकों, स्थानीय कलाओं और परंपराओं के साथ जुड़ सकें।

Did You Know?: हम्पी के विरूपाक्ष मंदिर जैसे स्थल यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं और कर्नाटक की सांस्कृतिक पहचान के स्तंभ हैं।

Frequently Asked Questions

1. KHCF का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य कर्नाटक के ऐतिहासिक स्मारकों का संरक्षण करना और निजी व सार्वजनिक भागीदारी के माध्यम से उनके विकास के लिए वित्तीय संसाधन जुटाना है।

2. इस फाउंडेशन के लिए पैसा कहाँ से आएगा?
धनराशि कॉर्पोरेट CSR, एनआरआई दान और आम जनता के योगदान के माध्यम से जुटाई जाएगी।