कर्नाटक सरकार ने मेकेदातु जलाशय और अन्य महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं के लिए केंद्र से तत्काल मंजूरी देने का आग्रह किया है। जल संसाधन मंत्री एन. चेल्लुरयस्वामी ने दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के शिखर सम्मेलन में यह मांग उठाई।
- मेकेदातु जलाशय परियोजना के संशोधित डीपीआर (DPR) को तुरंत मंजूरी देने की मांग।
- कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण-II के अंतिम आदेश पर गजट अधिसूचना जारी करने का आग्रह।
- कलासा-बंदूरी परियोजनाओं के लिए वन और पर्यावरण मंजूरी की आवश्यकता।
- ऊपरी कृष्णा परियोजना के लिए ₹5,300 करोड़ की बजटीय राशि जारी करने की मांग।
बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने एक बार फिर केंद्र सरकार से राज्य की विभिन्न लंबित सिंचाई और पेयजल परियोजनाओं को तत्काल मंजूरी देने की पुरजोर मांग की है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण मेकेदातु बैलेंसिंग जलाशय परियोजना का संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) शामिल है।
कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री एन. चेल्लुरयस्वामी के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के 'विभागीय शिखर सम्मेलन - 2026' में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने मेकेदातु, यूकेपी (UKP), कलासा-बंदूरी और ऊपरी भद्रा जैसी परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति और राज्य के लिए उनके महत्व पर केंद्रीय अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, कर्नाटक की जल सुरक्षा सीधे तौर पर इन परियोजनाओं की मंजूरी से जुड़ी है। मेकेदातु परियोजना न केवल बेंगलुरु शहर के लिए पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मांड्या, बेंगलुरु दक्षिण और चामराजनगर जिलों की जल आवश्यकताओं को पूरा करने में भी निर्णायक भूमिका निभाएगी। इसके अतिरिक्त, यह सूखे के वर्षों के दौरान तमिलनाडु को विनियमित रूप से पानी छोड़ने में भी मदद करेगी।
मेकेदातु परियोजना कर्नाटक की जल सुरक्षा और अंतरराज्यीय जल प्रबंधन के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
मंत्री चेल्लुरयस्वामी ने केंद्रीय जल आयोग से आग्रह किया कि वह मेकेदातु के संशोधित डीपीआर को तुरंत क्लियर करे। इसके अलावा, उन्होंने कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण-II के अंतिम आदेश पर तत्काल गजट अधिसूचना जारी करने की मांग की, ताकि ऊपरी कृष्णा परियोजना के तीसरे चरण के तहत आवंटित 130 tmcft पानी का राज्य उपयोग कर सके।
प्रतिनिधिमंडल ने महादयी बेसिन में कलासा और बंदूरी मोड़ परियोजनाओं के लिए वन और पर्यावरण मंजूरी की भी मांग की, जो हुब्बल्ली-धारवाड़ नगर निगम क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। साथ ही, ऊपरी कृष्णा परियोजना के लिए बजट में घोषित ₹5,300 करोड़ की राशि जारी करने का भी आग्रह किया गया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मेकेदातु और कृष्णा जल विवाद दशकों से कर्नाटक और पड़ोसी राज्यों के बीच चर्चा का केंद्र रहे हैं। ये परियोजनाएं न केवल कृषि उत्पादन के लिए, बल्कि बढ़ते शहरीकरण के कारण उत्पन्न पेयजल संकट को हल करने के लिए भी अनिवार्य हैं।
Frequently Asked Questions
1. मेकेदातु परियोजना क्यों महत्वपूर्ण है?
यह बेंगलुरु और आसपास के जिलों में पेयजल सुनिश्चित करने और तमिलनाडु के साथ जल वितरण को विनियमित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
2. कर्नाटक ने केंद्र से और क्या मांगा है?
राज्य ने कलासा-बंदूरी परियोजनाओं की मंजूरी और कृष्णा जल विवाद के तहत आवंटित पानी के उपयोग के लिए गजट अधिसूचना की मांग की है।