मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै बेंच ने तत्काल कृषि बिजली कनेक्शन योजना के तहत एकत्र किए गए ₹2,431.51 करोड़ के उपयोग की विशेष ऑडिट की मांग करने वाली याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

  • मद्रास उच्च न्यायालय ने ₹2,431.51 करोड़ की विशेष ऑडिट की मांग पर राज्य से जवाब मांगा।
  • याचिका में आरोप है कि 'तत्काल' शुल्क के कारण गरीब किसानों को कनेक्शन मिलने में देरी हो रही है।
  • DVAC से स्वतंत्र जांच और प्रशासनिक खामियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।

मदुरै में मद्रास उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने मंगलवार को एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। यह याचिका सी. सेलवाकुमार द्वारा दायर की गई है, जिसमें तमिलनाडु के प्रधान महालेखाकार (ऑडिट-I) को वर्ष 2021-22 से तत्काल कृषि बिजली कनेक्शन योजना के तहत एकत्र की गई भारी राशि की विशेष ऑडिट करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

न्यायाधीश सी.वी. कार्तिकेयन और आर. सक्तिवेल की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे सुनवाई के लिए 16 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया है। याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क यह है कि जिस योजना को सार्वजनिक सब्सिडी के माध्यम से मुफ्त कृषि बिजली कनेक्शन प्रदान करने के लिए बनाया गया था, उसमें 'तत्काल' तंत्र के माध्यम से एक समानांतर व्यवस्था विकसित कर ली गई है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल वित्तीय ऑडिट का नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय का भी है। जब एक 'मुफ्त' योजना में भुगतान करने वालों को प्राथमिकता दी जाती है, तो यह सीधे तौर पर सीमांत और छोटे किसानों के अधिकारों का हनन है। यदि यह साबित होता है कि संपन्न किसानों ने पैसे देकर कतार में आगे जगह बनाई है, तो यह सरकारी सब्सिडी के मूल उद्देश्य को विफल करता है।

"सार्वजनिक धन का उपयोग जब प्राथमिकता तय करने के लिए किया जाता है, तो वह कल्याणकारी योजनाओं के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करता है।"

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि पात्र किसान कई वर्षों से मुफ्त कनेक्शन का इंतजार कर रहे हैं, जबकि वे आवेदक जो निर्धारित शुल्क का भुगतान करने में सक्षम हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जा रही है। यह स्थिति उन छोटे किसानों के लिए अन्यायपूर्ण है जिनके लिए यह योजना वास्तव में बनाई गई थी।

इसके अतिरिक्त, याचिकाकर्ता ने DVAC (सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी निदेशालय) से इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच करने और किसी भी प्रशासनिक चूक या अनियमितता पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि सार्वजनिक धन की विशाल मात्रा और लंबित आवेदनों की संख्या को देखते हुए एक स्वतंत्र ऑडिट अनिवार्य है।

क्या आप जानते हैं?: कृषि बिजली सब्सिडी भारत के कई राज्यों में किसानों की आय बढ़ाने और सिंचाई लागत को कम करने का एक प्रमुख सरकारी उपकरण है।

Frequently Asked Questions

1. इस याचिका में कितनी राशि की ऑडिट की मांग की गई है?
याचिका में 2021-22 से एकत्र किए गए ₹2,431.51 करोड़ की विशेष ऑडिट की मांग की गई है।

2. याचिकाकर्ता का मुख्य आरोप क्या है?
आरोप है कि तत्काल शुल्क देने वाले संपन्न किसानों को प्राथमिकता मिल रही है, जबकि गरीब और सीमांत किसान कतार में पीछे छूट रहे हैं।