राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने वेल्लोर के ग्रीन सर्कल के पास दो-तरफा यातायात बहाल कर दिया है। ₹7.50 करोड़ की लागत वाले सबवे निर्माण के दूसरे चरण के पूरा होने के बाद यह निर्णय लिया गया है।

  • ग्रीन सर्कल के पास दो-तरफा यातायात फिर से शुरू।
  • ₹7.50 करोड़ की लागत से सबवे निर्माण का दूसरा चरण पूरा।
  • दुर्घटना संभावित 'ब्लैक स्पॉट' को सुधारने के लिए लिया गया निर्णय।
  • भारी वाहनों को अब लंबे डायवर्जन से राहत मिलेगी।

वेल्लोर: राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने वेल्लोर शहर के महत्वपूर्ण ग्रीन सर्कल के पास नियमित दो-तरफा यातायात व्यवस्था को सफलतापूर्वक बहाल कर दिया है। यह चौराहा चेन्नई-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग (NH 48) के एलिवेटेड कॉरिडोर के नीचे स्थित है। मंगलवार को यातायात प्रतिबंधों को हटाकर सैकड़ों वाहन चालकों को बड़ी राहत दी गई।

NHAI अधिकारियों के अनुसार, ग्रीन सर्कल के आसपास यातायात प्रतिबंध 12 जुलाई से लागू थे। ये प्रतिबंध ₹7.50 करोड़ की लागत वाली सबवे परियोजना के दूसरे और अंतिम चरण के कार्यों को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए लगाए गए थे। जैसे ही भूमिगत निर्माण कार्य पूरा हुआ, प्राधिकरण ने नियमित यातायात के लिए कैरिजवे को खोल दिया।

क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह क्षेत्र लंबे समय से एक 'ब्लैक स्पॉट' (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) के रूप में पहचाना गया था। ग्रीन सर्कल के पास अनियंत्रित यातायात और जटिल मोड़ के कारण यहाँ अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती थीं। सबवे के निर्माण का मुख्य उद्देश्य इस जोखिम को कम करना और यातायात के प्रवाह को सुव्यवस्थित करना है।

यातायात व्यवस्था की बहाली से न केवल वाहन चालकों का प्रतीक्षा समय कम होगा, बल्कि पैदल यात्रियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

इससे पहले, केवल दोपहिया वाहनों, ऑटो रिक्शा और कारों जैसे हल्के वाहनों को ही सर्विस लेन का उपयोग करने की अनुमति थी। भारी वाहनों को ग्रीन सर्कल तक पहुँचने के लिए लगभग दो किलोमीटर का लंबा डायवर्जन लेना पड़ रहा था, जिससे ईंधन और समय दोनों की बर्बादी हो रही थी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

वेल्लोर का यह हिस्सा NH 48 का एक अत्यंत व्यस्त खंड है, जो दक्षिण भारत के दो प्रमुख महानगरों को जोड़ता है। बढ़ती जनसंख्या और वाहनों की संख्या के कारण, पुराने राउंडअबाउट मॉडल में यातायात प्रबंधन करना कठिन हो गया था, जिसके कारण NHAI ने यहाँ सबवे बनाने का निर्णय लिया।

Did You Know?: 'ब्लैक स्पॉट' उन सड़क स्थानों को कहा जाता है जहाँ दुर्घटनाओं की दर सामान्य से कहीं अधिक होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. ग्रीन सर्कल के पास यातायात क्यों बाधित था?
सबवे निर्माण के दूसरे चरण के कार्यों को पूरा करने के लिए यातायात को नियंत्रित किया गया था।

2. सबवे परियोजना की कुल लागत क्या है?
इस महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना की कुल लागत ₹7.50 करोड़ है।