आंध्र प्रदेश जल संसाधन विभाग ने पोलावरम सिंचाई परियोजना के लेफ्ट मेन कैनाल (PIPLMC) का काम पूरा कर लिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के जरिए गोदावरी नदी के पानी को थंडावा, वराह और सारदा नदियों से जोड़ा जाएगा।

  • पोलावरम लेफ्ट मेन कैनाल (PIPLMC) का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा हुआ।
  • गोदावरी जल को थंडावा, वराह और सारदा नदियों से जोड़ने का विस्तृत प्रस्ताव तैयार।
  • विशाखापत्तनम और अनाकापल्ली जिलों को 23.44 TMC पानी की आपूर्ति होगी।
  • लगभग 1.5 लाख एकड़ क्षेत्र की सिंचाई और 4 लाख लोगों को पेयजल मिलेगा।

आंध्र प्रदेश के जल संसाधन विभाग ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए पोलावरम सिंचाई परियोजना लेफ्ट मेन कैनाल (PIPLMC) के निर्माण कार्य को पूरा कर लिया है। यह नहर नेलाकोटा (पोलावरम जिला) से शुरू होकर विशाखापत्तनम के मेघद्रि गेड्डा जलाशय तक 213.409 किलोमीटर की दूरी तय करती है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश में पेयजल और सिंचाई की व्यवस्था को सुदृढ़ करना है।

इस परियोजना को नई गति मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के हस्तक्षेप के बाद मिली। 11 जुलाई 2024 को दार्लापुडी गांव के दौरे के दौरान, उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि विशाखापत्तनम शहर और अनाकापल्ली की ग्रामीण व सिंचाई आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 23.44 TMC पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

परियोजना का विस्तृत प्रभाव और वितरण

यह मुख्य नहर और इसका वितरण नेटवर्क लगभग 1.5 लाख एकड़ के अयकुट (सिंचाई क्षेत्र) को कवर करेगा। इससे नक्कपल्ली, एस. रायवरम, पायाकरापेटा, येलामंचिली, रामबिली, कासिमकोटा और अनाकापल्ली मंडलों के 204 गांवों को सीधा लाभ मिलेगा। पहले चरण में, गुरुत्वाकर्षण (gravity) के माध्यम से 56 लघु सिंचाई टैंकों में पानी भेजा जाएगा, जिनमें 24 थंडावा नदी, 27 वराह नदी और 5 सारदा नदी के माध्यम से होंगे।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह परियोजना केवल बुनियादी ढांचे का विकास नहीं है, बल्कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एक सुरक्षा कवच है। एल नीनो (El Niño) जैसे वर्षों में जब बारिश कम होती है, तब यह इंटरलिंकिंग सिस्टम किसानों के लिए जीवन रेखा साबित होगा। यह ऊपरी तटवर्ती जल उपयोग को अनुकूलित करेगा और क्षेत्रीय खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

"PIPLMC का लघु सिंचाई स्रोतों और ओपन हेड चैनलों के साथ एकीकरण संसाधनों के अधिकतम उपयोग को सुनिश्चित करता है, जिससे किसानों को अनिश्चित मौसम के खिलाफ एक विश्वसनीय सुरक्षा जाल मिलता है।" - पी. अप्पला नायडू, अधीक्षण अभियंता।

इंजीनियरिंग के नजरिए से, तुनी के पास 325 क्यूसेक पानी को थंडावा सिस्टम के जरिए मोड़ा जाएगा, जबकि वराह नदी बेसिन में 586 क्यूसेक और सारदा नदी नेटवर्क के लिए मामिडीवाका गेड्डा के माध्यम से 350 क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा। इसके अलावा, तुनी के आगे 290 गांवों की 4 लाख की आबादी को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।

नदी/सिस्टम पानी की मात्रा (Cusecs) लाभान्वित क्षेत्र (एकड़)
थंडावा नदी 325 14,795.15
वराह नदी 586 26,652.63
सारदा नदी 350 -
क्या आप जानते हैं?: पोलावरम परियोजना भारत की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में से एक है, जिसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा प्राप्त है और यह गोदावरी नदी के जल प्रबंधन का केंद्र है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: PIPLMC नहर की कुल लंबाई कितनी है?
उत्तर: इस नहर की कुल लंबाई 213.409 किलोमीटर है, जो नेलाकोटा से मेघद्रि गेड्डा जलाशय तक फैली है।

प्रश्न 2: 'जल हरति' कार्यक्रम क्या है?
उत्तर: यह एक औपचारिक कार्यक्रम है जिसके तहत मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू अनाकापल्ली और विशाखापत्तनम जिलों के लिए गोदावरी जल छोड़ेंगे।