शिवमोगा की एक विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार के मामले में एक पूर्व डिप्टी तहसीलदार को चार साल के कारावास और 40,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। अधिकारी ने एक मूक व्यक्ति की पेंशन मंजूर करने के बदले रिश्वत मांगी थी।
- पूर्व डिप्टी तहसीलदार पुष्पलता को 4 साल की जेल और 40,000 रुपये जुर्माना।
- मूक व्यक्ति की विकलांग पेंशन मंजूर करने के लिए 10,000 रुपये की रिश्वत मांगी गई थी।
- कर्नाटक लोकायुक्त पुलिस ने 2017 में रंगे हाथ गिरफ्तारी की थी।
शिवमोगा की प्रथम अतिरिक्त जिला और सत्र एवं विशेष अदालत ने मंगलवार को भ्रष्टाचार के एक गंभीर मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने राजस्व विभाग की एक पूर्व अधिकारी, पुष्पलता, को चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला वर्ष 2017 का है, जब वह भद्रावती तालुक में डिप्टी तहसीलदार के पद पर कार्यरत थीं।
मामले के विवरण के अनुसार, डी.बी. हल्ली के निवासी गिरीश ने अपने पिता परमेश्वरप्पा के लिए विकलांगता पेंशन के आवेदन किया था। परमेश्वरप्पा जन्म से ही मूक (speech-impaired) हैं और उनके पास सभी आवश्यक मेडिकल सर्टिफिकेट मौजूद थे। इसके बावजूद, डिप्टी तहसीलदार पुष्पलता ने पेंशन की मंजूरी देने के बदले गिरीश से 10,000 रुपये की रिश्वत की मांग की।
जब अधिकारी ने अपनी मांग पर अड़े रहने की कोशिश की, तो गिरीश ने हार मानने के बजाय कर्नाटक लोकायुक्त पुलिस का दरवाजा खटखटाया। लोकायुक्त पुलिस ने एक जाल बिछाया और 21 सितंबर 2017 को पुष्पलता को 5,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this verdict sends a powerful signal to the administrative machinery. When officials exploit the most vulnerable sections of society—such as the disabled—for personal gain, the legal system must act decisively to restore public trust in governance.
"The conviction of a high-ranking revenue official underscores that no one is above the law, especially when the crime involves denying basic social security to the marginalized."
इस पूरे मामले की जांच लोकायुक्त निरीक्षक जी.एस. थिप्पेस्वामी द्वारा की गई थी, जिन्होंने पुख्ता सबूतों के साथ चार्जशीट दाखिल की। अदालत ने पाया कि आरोपी ने अपने पद का दुरुपयोग कर एक जरूरतमंद नागरिक को प्रताड़ित किया, जो कानूनन अक्षम्य है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: अधिकारी को कितनी सजा सुनाई गई?
उत्तर: पूर्व डिप्टी तहसीलदार पुष्पलता को 4 साल की जेल और 40,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
प्रश्न 2: यह मामला कब का है?
उत्तर: यह मामला सितंबर 2017 का है, जब अधिकारी को रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था।