मलनाड रायता होराटा समिति के संयोजक टी.एन. श्रीनिवास ने शिवमोगा के निर्वाचित प्रतिनिधियों पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने विशेष रूप से पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र (ESA) और भूमि विवादों पर चुप्पी साधने का मुद्दा उठाया।
- शिवमोगा के सभी विधायकों और सांसद से इस्तीफे की मांग।
- मलनाड किसानों के हितों और भूमि अधिकारों की अनदेखी का आरोप।
- कस्तूरीरंगन रिपोर्ट और पश्चिमी घाट ESA अधिसूचना पर गंभीर आपत्ति।
- भूमि मुआवजे और वन विभाग के विवादों का समाधान न होना।
शिवमोगा में मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, मलनाड रायता होराटा समिति के संयोजक टी.एन. श्रीनिवास ने जिले के राजनीतिक नेतृत्व पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवमोगा के निर्वाचित प्रतिनिधि, जिनमें सांसद और विधायक शामिल हैं, क्षेत्र के किसानों की बुनियादी समस्याओं को विधानसभा या संसद में उठाने में पूरी तरह विफल रहे हैं। श्रीनिवास के अनुसार, ये नेता किसानों की वास्तविक पीड़ा से अनजान हैं या जानबूझकर इसे नजरअंदाज कर रहे हैं।
समिति ने विशेष रूप से उन किसानों के मुद्दे को उठाया जिन्होंने बांध परियोजनाओं के कारण अपनी उपजाऊ भूमि खो दी। श्रीनिवास ने बताया कि मुआवजे के तौर पर दी गई भूमि का मालिकाना हक किसान नहीं पा सके, क्योंकि उस भूमि को 'वन क्षेत्र' घोषित कर दिया गया है। इस गंभीर प्रशासनिक विफलता पर निर्वाचित प्रतिनिधियों की चुप्पी को उन्होंने अक्षम्य बताया है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this demand is not just about political rivalry but reflects a deep-seated systemic failure in representing the agrarian economy of the Malnad region. When legislative representatives fail to bridge the gap between grassroots grievances and policy-making, it leads to widespread rural unrest and a loss of faith in democratic institutions.
पश्चिमी घाट को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESA) घोषित करने के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पर चर्चा करते हुए, श्रीनिवास ने कहा कि नेताओं ने इस मुद्दे की गंभीरता को नहीं समझा है। उन्होंने केरल मॉडल के आधार पर सर्वेक्षण के समर्थन को गलत बताया और कहा कि यह कर्नाटक की स्थिति के लिए सहायक नहीं होगा।
"जब जनप्रतिनिधि केवल कागजी रिपोर्टों और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में उलझे रहते हैं, तो जमीन पर किसान अपनी पहचान और आजीविका दोनों खो देता है।"
कस्तूरीरंगन रिपोर्ट की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट केवल सैटेलाइट छवियों पर आधारित थी और इसमें ग्राम पंचायतों के साथ कोई परामर्श नहीं किया गया। उन्होंने इस रिपोर्ट को 'कूड़ेदान में फेंकने योग्य' करार दिया और कहा कि इस पर प्रभावी ढंग से आवाज न उठाने के कारण अब नेताओं को नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए।
Frequently Asked Questions
1. टी.एन. श्रीनिवास ने इस्तीफे की मांग क्यों की?
क्योंकि उनका मानना है कि शिवमोगा के विधायक और सांसद मलनाड किसानों के हितों की रक्षा करने और उनके मुद्दों को विधायिका में उठाने में विफल रहे हैं।
2. कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर मुख्य विवाद क्या है?
विवाद यह है कि रिपोर्ट ग्राम पंचायतों से परामर्श किए बिना केवल सैटेलाइट इमेजरी के आधार पर तैयार की गई थी, जिससे स्थानीय किसानों की जमीन प्रभावित हो सकती है।