केरल सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति ने 'प्रियदर्शिनी' मुफ्त बस योजना के कारण निजी बस ऑपरेटरों को हो रहे भारी नुकसान की भरपाई के लिए समय सारणी में बदलाव और लीजिंग मॉडल जैसे सुझाव दिए हैं।
- विशेषज्ञ समिति ने 'प्रियदर्शिनी' योजना के समय में बदलाव का सुझाव दिया है।
- निजी बस ऑपरेटरों को प्रतिदिन ₹1,500 से ₹6,000 तक का नुकसान हो रहा है।
- सरकार द्वारा निजी बसों को लीज पर लेने के मॉडल का प्रस्ताव दिया गया है।
- योजना लागू होने के बाद लगभग 500 बसें सेवा से बाहर हो गई हैं।
केरल सरकार द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें 'प्रियदर्शिनी' मुफ्त बस यात्रा योजना के कारण निजी बस ऑपरेटरों को हो रहे वित्तीय संकट को दूर करने के लिए ठोस उपायों की सिफारिश की गई है। पूर्व परिवहन आयुक्त और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी के. पद्मकुमार के नेतृत्व वाली इस समिति ने सुझाव दिया है कि सरकारी बसों के समय में बदलाव किया जाए ताकि निजी ऑपरेटरों के राजस्व पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सके।
समिति की रिपोर्ट के बाद, मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन और परिवहन मंत्री ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण बैठक की। मुख्यमंत्री ने मीडिया को बताया कि रिपोर्ट में निजी बस उद्योग को इस योजना के प्रतिकूल प्रभावों से बचाने के लिए मजबूत उपाय शामिल हैं। यह मामला तब गंभीर हो गया जब जून में योजना लागू होने के बाद से कोल्लम, पतनमथिट्टा और वायनाड जैसे जिलों में निजी बस ऑपरेटरों ने भारी राजस्व हानि की सूचना दी।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि सार्वजनिक परिवहन में सरकारी सब्सिडी और निजी क्षेत्र के बीच संतुलन बनाए रखना किसी भी राज्य के लिए एक बड़ी चुनौती है। यदि निजी ऑपरेटरों के घाटे का समाधान नहीं किया गया, तो परिवहन नेटवर्क में बड़े पैमाने पर व्यवधान आ सकता है, जिससे अंततः यात्रियों को असुविधा होगी।
समिति ने एक नया मॉडल भी प्रस्तावित किया है जिसके तहत सरकार निजी बसों को एक निश्चित दर प्रति किलोमीटर पर लीज पर ले सकती है। बस मालिकों ने पहले ही इस विकल्प के प्रति अपनी सहमति जताई है। रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया है कि संवेदनशील मार्गों पर निजी बसों को प्रतिदिन ₹1,500 से ₹6,000 तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
निजी ऑपरेटरों के वित्तीय अस्तित्व और महिलाओं के लिए कल्याणकारी योजनाओं के बीच संतुलन बनाना राज्य के लिए अनिवार्य है।
गौरतलब है कि 'प्रियदर्शिनी' योजना के लागू होने के बाद से लगभग 500 बसें पूरी तरह से परिचालन से बाहर हो गई हैं। निजी बस मालिकों ने मांग की है कि उन्हें भी केएसआरटीसी (KSRTC) की तरह वित्तीय सहायता प्रदान की जाए। समिति ने तिरुवनंतपुरम, एर्नाकुलम और कोझिकोड में विभिन्न बैठकें करने के बाद यह विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है।
Historical Background
केरल में सार्वजनिक परिवहन का ढांचा मुख्य रूप से केएसआरटीसी और निजी ऑपरेटरों के सह-अस्तित्व पर टिका है। 'प्रियदर्शिनी' जैसी कल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण है, लेकिन इनका सीधा प्रभाव निजी क्षेत्र के राजस्व पर पड़ता है, जिससे अक्सर सरकार और ऑपरेटरों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो जाती है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: 'प्रियदर्शिनी' योजना क्या है?
उत्तर: यह केरल सरकार की एक योजना है जो महिलाओं को केएसआरटीसी की साधारण बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा प्रदान करती है।
प्रश्न 2: निजी बस मालिकों की मुख्य मांग क्या है?
उत्तर: उनकी मुख्य मांग वित्तीय नुकसान की भरपाई और केएसआरटीसी की तरह सरकारी सहायता प्राप्त करना है।