विदेशी मुद्रा गैर‑निवेशक (FCNR) (B) योजना में विदेशी निवेशकों ने $100 अरब से अधिक जमा कराए, जिससे RBI के $80 अरब के अनुमान से काफी अधिक हो गया। यह भारतीय विदेशी मुद्रा भंडार को रिकॉर्ड स्तर पर ले गया है।

  • FCNR(B) में कुल प्रवाह $100 अरब से अधिक
  • RBI का अनुमान $80 अरब था, अब 20 अरब अधिक
  • विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने हाल ही में बताया कि विदेशी मुद्रा गैर‑निवेशक (FCNR) (B) योजना में विदेशी निवेशकों द्वारा जमा की गई राशि $100 अरब से अधिक हो गई है। यह आंकड़ा RBI के शुरुआती $80 अरब के अनुमान से 25% अधिक है।

यह प्रवाह मुख्यतः भारतीय मूल के विदेशियों (NRIs) और प्रॉम्प्ट डिपॉज़िटर्स द्वारा किया गया है, जिन्होंने भारतीय रुपये के मुकाबले डॉलर में अपनी बचत को सुरक्षित करने के लिए इस योजना को चुना।

इन जमा राशि के कारण भारत के विदेशी मुद्रा भंडार ने अब तक का सबसे ऊँचा स्तर हासिल कर लिया है, जिससे देश की वित्तीय स्थिरता में मजबूती आती है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

FCNR(B) योजना 1970 के दशक में शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य विदेशियों को भारतीय बैंकों में विदेशी मुद्रा में जमा करने की सुविधा देना था। तब से यह योजना कई बार संशोधित हुई है, लेकिन इसका मूल उद्देश्य विदेशी निवेश को आकर्षित करना बना रहा।

पिछले पाँच वर्षों में RBI ने विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए, जिसमें विदेशी निवेशकों के लिए आसान नियम और उच्च ब्याज दरें शामिल थीं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the unprecedented inflow into FCNR(B) not only strengthens India's external buffers but also signals growing confidence among NRIs in India's economic outlook, even as short‑term dollar pressures persist.

"FCNR(B) में इस स्तर की वृद्धि RBI की नीति की प्रभावशीलता को दर्शाती है और विदेशी निवेशकों के भरोसे को बढ़ाती है," कहा वित्तीय विश्लेषक अजय सिंह ने।
Did You Know?: FCNR(B) योजना के तहत जमा पर ब्याज दरें अक्सर भारतीय बैंकों की घरेलू बचत दरों से अधिक होती हैं, जिससे यह निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बनता है।

Frequently Asked Questions

Q1: FCNR(B) योजना में जमा करने के लिए कौन‑कौन योग्य है?
A: भारतीय मूल के विदेशी नागरिक, NRI, PIO और विदेशी कंपनियां इस योजना में भाग ले सकती हैं।

Q2: इस बड़ी प्रवाह का भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
A: यह विदेशी मुद्रा भंडार को सुदृढ़ करेगा, मुद्रा स्थिरता में मदद करेगा और संभावित आर्थिक शॉक के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करेगा।