नेपाल और तिब्बत में आई भीषण बाढ़ के बाद उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में गंडक नदी से पांच नेपाली नागरिकों के शव बरामद किए गए हैं, जिन्हें सोनौली बॉर्डर पर नेपाल पुलिस को सौंप दिया गया है।

  • नेपाल और तिब्बत में आई विनाशकारी बाढ़ के कारण अब तक 1,000 से अधिक मौतें हो चुकी हैं।
  • कुशीनगर में गंडक नदी से दो महिलाओं और तीन पुरुषों के शव बरामद किए गए।
  • सोनौली सीमा पर नेपाल पुलिस को शव सौंपे गए, जो अब बुटवल भेजे जाएंगे।
  • गंडक बैराज से 1,50,200 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है।

उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर जिलों में बाढ़ का कहर जारी है। हाल ही में, नेपाल और तिब्बत में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) में बह गए पांच नेपाली नागरिकों के शव गंडक नदी से बरामद किए गए। इन शवों को मंगलवार को सोनौली सीमा पर नेपाल पुलिस को आधिकारिक रूप से सौंप दिया गया।

अधिकारियों के अनुसार, बरामद किए गए शवों में दो महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं। इन शवों को कुशीनगर से सोनौली लाया गया और शाम करीब 4 बजे बेलहिया पुलिस स्टेशन के प्रभारी उप-निरीक्षक हरिराम डांगी को सौंप दिया गया। अब इन शवों को पहचान प्रक्रिया के लिए बुटवल भेजा जा रहा है, जहां से उन्हें उनके परिवारों को सौंपा जाएगा।

क्यों यह चिंता का विषय है?

BozokMedia analysis shows कि सीमावर्ती क्षेत्रों में नदियों का बढ़ता जलस्तर एक गंभीर मानवीय संकट की ओर इशारा कर रहा है। नेपाल और उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने नदियों के जलस्तर को खतरे के निशान के करीब पहुंचा दिया है। गंडक बैराज (Valmikinagar) से 1,50,200 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा बढ़ गया है।

बाढ़ के बढ़ते जलस्तर और बैराज से पानी छोड़े जाने की स्थिति में सीमावर्ती क्षेत्रों में तत्काल राहत और बचाव कार्यों का सुदृढ़ीकरण अनिवार्य है।

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, महाराजगंज में पिछले 24 घंटों में 33.5 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जिससे कुल संचयी वर्षा 655.5 मिमी तक पहुंच गई है। हालांकि राप्ती, चंदन और प्यास नदियां अभी खतरे के निशान से नीचे हैं, लेकिन महाव नाला खतरे के निशान (5 फीट) को पार कर 9 फीट पर बह रहा है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

हिमालयी क्षेत्र में मानसून के दौरान फ्लैश फ्लड एक आम लेकिन घातक घटना बन गई है। नेपाल और तिब्बत के उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा के कारण नदियां अचानक उफान पर आ जाती हैं, जिससे सीमावर्ती मैदानी इलाकों में भारी तबाही मचती है। पिछले कुछ वर्षों में, जल प्रबंधन और बांधों के अचानक पानी छोड़ने से सीमावर्ती राज्यों के बीच समन्वय की आवश्यकता और बढ़ गई है।

Did You Know?: गंडक नदी को नेपाल में नारायणी नदी के नाम से भी जाना जाता है, जो भारत और नेपाल के बीच एक महत्वपूर्ण जल संसाधन है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: बरामद किए गए शवों को कहां भेजा गया है?
उत्तर: शवों को पहचान और परिवार को सौंपने के लिए नेपाल के बुटवल भेजा गया है।

प्रश्न 2: वर्तमान में नदियों की स्थिति क्या है?
उत्तर: गंडक और महाव नाला खतरे के स्तर के करीब हैं, जबकि अन्य नदियां निगरानी में हैं।