बिहार में मौसम का मिजाज बिगड़ा है, मौसम विभाग ने पटना सहित 31 जिलों के लिए अगले 48 घंटों तक भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के कारण राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं।
- पटना समेत 31 जिलों में अगले 48 घंटों के लिए भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट।
- बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र के कारण मौसम में बदलाव।
- नदियों के उफान से कई इलाकों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति।
- तापमान में 3°C तक की गिरावट की संभावना।
बिहार में मानसून एक बार फिर रौद्र रूप धारण कर चुका है। मौसम विभाग (IMD) ने मंगलवार को पटना में हुई मूसलाधार बारिश के बाद अब प्रदेश के 31 जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। यह चेतावनी अगले 48 घंटों, यानी 5 सितंबर तक प्रभावी रहेगी। बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र और उसके प्रभाव से ओडिशा, झारखंड और बिहार में बारिश का यह सिलसिला जारी रहने वाला है।
नदियों का बढ़ता जलस्तर और तबाही
बारिश का असर अब जान-माल के नुकसान के रूप में दिखने लगा है। जहानाबाद में दरधा नदी का जलस्तर बढ़ने से जाफरगंज पुल के ऊपर से लगभग 2 फीट पानी बह रहा है। वहीं, बक्सर में गंगा की सहायक नदियां उफान पर हैं। कर्मनाशा नदी का पानी सिकरौल गांव के रास्ते पर तीन फीट ऊपर तक आ गया है, जिससे ग्रामीणों का जीवन संकट में पड़ गया है।
कैमूर की पहाड़ियों पर हुई भारी बारिश ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। दुर्गावती, सुगवा और सासाराम की नदियां उफान पर हैं। सुगवा नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण गुप्ता धाम के सामने स्थित दर्जनों दुकानें बाढ़ की चपेट में आकर बह गई हैं। सहरसा में एक दुखद घटना भी सामने आई है, जहाँ तेज हवा के कारण 15 लोगों से भरी नाव पलट गई, जिसमें एक महिला की मौत हो गई और एक बच्ची लापता है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि बिहार में इस समय बारिश का पैटर्न बेहद अनिश्चित है। एक तरफ जहां बाढ़ और जलभराव से बुनियादी ढांचा चरमरा रहा है, वहीं दूसरी ओर राज्य में मानसून की कुल वर्षा अभी भी सामान्य से काफी कम है। यह स्थिति कृषि और आपदा प्रबंधन दोनों के लिए बड़ी चुनौती पेश करती है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी का वर्तमान सिस्टम अगले 48 घंटों तक बिहार के तटीय और मैदानी इलाकों में भारी वज्रपात और मूसलाधार बारिश का कारण बनेगा।
भागलपुर के नवगछिया में गंगा के कटाव के कारण 100 साल पुराना ऐतिहासिक दुर्गा मंदिर नदी में समा गया। इसके अलावा, रोहतास के मांझर कुंड में भी तेज बहाव के कारण दो युवक फंस गए थे, जिन्हें सुरक्षित निकाला गया। खगड़िया के परबत्ता में सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त है।
मानसून का गणित: 40% की कमी
दिलचस्प बात यह है कि इतनी भारी बारिश के बावजूद, बिहार में इस साल मानसून की स्थिति चिंताजनक है। अब तक राज्य में 782.6 mm बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन केवल 487.6 mm ही दर्ज की गई है। यानी राज्य में अभी भी सामान्य से लगभग 40% कम बारिश हुई है। हालांकि, पिछले 24 घंटों में औरंगाबाद, रोहतास और नवादा में हुई अच्छी बारिश से इस कमी को भरने की उम्मीद जगी है।
Frequently Asked Questions
1. बिहार के किन जिलों में सबसे अधिक बारिश का खतरा है?
पटना सहित 31 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जिनमें भारी बारिश और वज्रपात की संभावना है।
2. क्या बारिश का यह दौर 5 सितंबर के बाद समाप्त हो जाएगा?
5 सितंबर तक तीव्रता अधिक रहने का अनुमान है, उसके बाद बारिश की तीव्रता धीरे-धीरे कम हो सकती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर वर्षा जारी रह सकती है।