दिल्ली के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, लोक नायक जयप्रकाश (LNJP) में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी देखी जा रही है, जहाँ एक मरीज को MRI टेस्ट के लिए दिसंबर 2028 तक का समय दिया गया है।

  • LNJP अस्पताल में केवल एक कार्यात्मक MRI मशीन उपलब्ध है।
  • दैनिक 5,000 से अधिक OPD मरीजों के सामने मशीनों और स्टाफ की भारी कमी है।
  • मरीजों को निजी केंद्रों पर रेफर करने के लिए दिल्ली आरोग्य कोष का सहारा लेना पड़ रहा है।

दिल्ली के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में से एक, लोक नायक जयप्रकाश (LNJP) अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का एक भयावह चेहरा सामने आया है। सहारनपुर के रहने वाले 46 वर्षीय शाहजद, जो एक कार ड्राइवर हैं, जब अस्पताल पहुंचे तो उन्हें अपने सिर के MRI के लिए 21 दिसंबर 2028 की तारीख दी गई। यह सुनकर शाहजद और वहां मौजूद अन्य मरीज स्तब्ध रह गए। शाहजद पिछले डेढ़ साल से बीमारी के कारण काम करने में असमर्थ हैं और उनका परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है।

अस्पताल की मौजूदा स्थिति यह है कि प्रतिदिन 5,000 से अधिक मरीज ओपीडी (OPD) में आते हैं, लेकिन जांच के लिए केवल एक ही MRI मशीन और एक ही CT स्कैनर चालू स्थिति में है। मशीन की कमी के कारण मरीजों को महीनों, और कुछ मामलों में वर्षों तक इंतजार करना पड़ रहा है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे में मशीनों और विशेषज्ञों की कमी न केवल मरीजों की पीड़ा को बढ़ाती है, बल्कि यह सरकार के 'मुफ्त और सुलभ स्वास्थ्य सेवा' के दावों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। जब एक जीवन रक्षक जांच के लिए वर्षों का इंतजार करना पड़े, तो यह प्रणालीगत विफलता का संकेत है।

मशीनों की कमी और रेडियोलॉजिस्ट की अनुपलब्धता ने सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को एक ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया है जहाँ निजी क्षेत्र अनौपचारिक रूप से इस मांग का लाभ उठा रहा है।

अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, एक MRI मशीन 12 घंटे के संचालन में दिन भर में अधिकतम 10 स्कैन ही कर सकती है। इसमें पंजीकरण, मरीज की तैयारी, मेटल स्क्रीनिंग और इमेज रिव्यू जैसी लंबी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। इसके बावजूद, मरीजों की संख्या मशीन की क्षमता से कई गुना अधिक है।

दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने कहा है कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के माध्यम से CSR पहल के तहत एक नई MRI और CT मशीन मंगवाई गई है, जो वर्तमान में ट्रायल पर है। हालांकि, डॉक्टरों का मानना है कि केवल एक नई मशीन से इस विशाल समस्या का समाधान नहीं होगा क्योंकि स्टाफ की कमी अभी भी बनी हुई है।

इस कमी को पूरा करने के लिए अस्पताल दिल्ली आरोग्य कोष (DAK) योजना के तहत मरीजों को निजी केंद्रों पर भेज रहा है। आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से जुलाई के बीच सैकड़ों मरीजों को निजी केंद्रों पर रेफर किया गया है। विशेषज्ञ इसे एक 'प्रेशर वाल्व' की तरह देखते हैं, जो सरकारी तंत्र के दबाव को कम तो करता है, लेकिन निजी क्षेत्र के मुनाफे का जरिया भी बन जाता है।

Did You Know?: दिल्ली आरोग्य कोष (DAK) पात्र मरीजों को इलाज और जांच के लिए 5 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: LNJP अस्पताल में MRI के लिए इतनी देरी क्यों हो रही है?
उत्तर: अस्पताल में प्रतिदिन 5,000 से अधिक मरीज आते हैं, लेकिन जांच के लिए केवल एक ही कार्यात्मक MRI मशीन उपलब्ध है।

प्रश्न 2: क्या सरकार नई मशीनें ला रही है?
उत्तर: हाँ, स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार CSR पहल के माध्यम से नई मशीनें मंगवाई गई हैं जो अभी ट्रायल पर हैं।

सुविधामौजूदा स्थितिआवश्यकता
MRI मशीनें1 (कार्यात्मक)अत्यधिक (5,000+ OPD के लिए)
CT स्कैनर1 (कार्यात्मक)उच्च
स्टाफभारी कमीविशेषज्ञों और तकनीशियनों की आवश्यकता