दिल्ली सरकार ने सड़कों की बार-बार होने वाली खुदाई और ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए मल्टी-यूटिलिटी अंडरग्राउंड डक्ट्स का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की मंजूरी दे दी है। चांदनी चौक के दो प्रमुख इलाकों से शुरू होने वाला यह प्रोजेक्ट बिजली, पानी और गैस जैसी सेवाओं को एक ही भूमिगत गलियारे में लाएगा।

  • दिल्ली सरकार सड़कों की बार-बार होने वाली खुदाई को रोकने के लिए मल्टी-यूटिलिटी डक्ट्स बनाएगी।
  • चांदनी चौक के एस्प्लेनेड रोड और मोर सराय रोड पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा।
  • इन डक्ट्स में बिजली, पानी, गैस और फायर-हाइड्रेंट जैसी सेवाएं एक साथ रहेंगी।
  • एक विशेषज्ञ तकनीकी समिति डिजाइन और रखरखाव की निगरानी करेगी।

दिल्ली की सड़कों पर बार-बार होने वाली खुदाई और उसके कारण होने वाले भारी ट्रैफिक व्यवधान को समाप्त करने के लिए दिल्ली सरकार ने एक क्रांतिकारी योजना को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, सरकार शहर भर में मल्टी-यूटिलिटी अंडरग्राउंड डक्ट्स (Multi-utility underground ducts) विकसित करने की योजना बना रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य बिजली, पानी, गैस और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए एक साझा भूमिगत गलियारा बनाना है, ताकि भविष्य में मरम्मत के लिए बार-बार सड़क न खोदनी पड़े।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत चांदनी चौक के दो प्रमुख हिस्सों से होगी। पायलट प्रोजेक्ट के तहत एस्प्लेनेड रोड के 310 मीटर और मोर सराय रोड के 560 मीटर हिस्से को कवर किया जाएगा। इन क्षेत्रों में काम जल्द ही शुरू होने वाला है। यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो सरकार इसे दिल्ली के अन्य हिस्सों में भी लागू करने पर विचार करेगी।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले महानगर में, विभिन्न सरकारी एजेंसियां (जैसे DJB, PWD और बिजली विभाग) अक्सर अलग-अलग समय पर खुदाई करती हैं, जिससे न केवल सड़कों की गुणवत्ता खराब होती है बल्कि नागरिकों को भारी असुविधा भी होती है। यह नया सिस्टम इस 'खुदाई चक्र' को तोड़ देगा।

यह बुनियादी ढांचा न केवल सड़कों की उम्र बढ़ाएगा, बल्कि भविष्य की शहरी जरूरतों के लिए एक टिकाऊ मॉडल भी पेश करेगा।

परियोजना के तकनीकी पहलुओं को सुनिश्चित करने के लिए एक विशेषज्ञ तकनीकी समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति में दिल्ली जल बोर्ड (DJB), लोक निर्माण विभाग (PWD), बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) और अन्य संबंधित विभागों के विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह समिति डक्ट्स के डिजाइन, वेंटिलेशन, अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की देखरेख करेगी।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस पहल पर जोर देते हुए कहा, "हम ऐसा बुनियादी ढांचा बनाना चाहते हैं जो सुरक्षित, सुव्यवस्थित और टिकाऊ हो। मल्टी-यूटिलिटी डक्ट भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है।"

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

वर्तमान में, दिल्ली में उपयोगिता सेवाओं का प्रबंधन बिखरा हुआ है। जब भी किसी पाइपलाइन या केबल में खराबी आती है, तो संबंधित विभाग सड़क खोदता है, जिससे सड़क की संरचनात्मक मजबूती कम हो जाती है। गुजरात के GIFT सिटी जैसे नियोजित शहरी क्षेत्रों में पहले से ही इस तरह के 'यूटिलिडोर' (Utilidors) का उपयोग किया जा रहा है, जहां एक ही सुरंग के भीतर कई सेवाएं मौजूद होती हैं।

Did You Know?: इस तकनीक को 'यूटिलिडोर' (Utilidors) कहा जाता है, जो बड़े शहरों में रखरखाव के खर्च को 40% तक कम कर सकती है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: इस परियोजना का मुख्य लाभ क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य लाभ सड़कों की बार-बार होने वाली खुदाई को रोकना, ट्रैफिक जाम कम करना और सेवाओं के रखरखाव को आसान बनाना है।

प्रश्न 2: यह प्रोजेक्ट कहाँ से शुरू हो रहा है?
उत्तर: यह पायलट प्रोजेक्ट चांदनी चौक के एस्प्लेनेड रोड और मोर सराय रोड से शुरू हो रहा है।