केंद्र सरकार ने 2027 की जनगणना में OBC सूचियों का उपयोग न करने का निर्णय लिया है। अधिकारियों का कहना है कि इन सूचियों में जातियों के बजाय विभिन्न 'वर्गों' का विवरण है।

  • सरकार 2027 की जनगणना में जातियों की गणना के लिए 'ओपन-कॉलम' पद्धति का उपयोग करेगी।
  • OBC सूचियों में जातियों के बजाय व्यावसायिक समूहों और सामाजिक वर्गों का उल्लेख है।
  • विपक्ष और ओबीसी समूहों ने विशिष्ट जाति कोडिंग की मांग तेज कर दी है।

नई दिल्ली में सरकारी अधिकारियों के अनुसार, आगामी 2027 की जनगणना के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने तय किया है कि जनगणना के दौरान जातियों की गणना के लिए मौजूदा केंद्रीय या राज्य स्तरीय अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) सूचियों का उपयोग नहीं किया जाएगा। इसके बजाय, सरकार 'ओपन-कॉलम' (खुला कॉलम) पद्धति अपनाएगी।

अधिकारियों का तर्क है कि OBC सूचियों में कई प्रविष्टियां वास्तव में 'जाति' को नहीं, बल्कि 'वर्गों' को दर्शाती हैं। उदाहरण के लिए, कुछ सूचियों में ऐसे समूहों का उल्लेख है जो विशिष्ट व्यवसायों से जुड़े हैं, जैसे कि 'भिखारी' या 'चाय बागान के श्रमिक'। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की सूचियों में 'स्थानीय जन्मे लोग' जैसे शब्द भी शामिल हैं, जो किसी जातिगत पहचान के बजाय एक सामाजिक वर्ग को परिभाषित करते हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह निर्णय भारत के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि सरकार OBC सूचियों का उपयोग करती, तो डेटा की शुद्धता पर सवाल उठ सकते थे क्योंकि ये सूचियां केवल जातियों तक सीमित नहीं हैं। हालांकि, इस निर्णय ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया है।

OBC सूचियों में जाति और वर्ग के बीच का धुंधला अंतर ही सरकार के इस निर्णय का मुख्य आधार बना है।

विपक्षी नेताओं, जिनमें राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल हैं, ने इस 'ओपन-कॉलम' पद्धति की उपयोगिता पर सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि यह पद्धति 2011 के सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) की तरह ही परिणाम दे सकती है, जिसमें 46 लाख से अधिक जाति नाम सामने आए थे।

ऐतिहासिक रूप से, भारत में जाति गणना हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रही है। 1931 की जनगणना के बाद से व्यापक जातिगत डेटा का अभाव रहा है, जिससे वर्तमान में ओबीसी आबादी का सटीक अनुमान लगाना कठिन हो गया है। सरकार ने अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित सूचियों का उपयोग जारी रखने का निर्णय लिया है, लेकिन अन्य जातियों के लिए खुला कॉलम ही एकमात्र विकल्प बचा है।

Did You Know?: 2011 की सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना में जातियों की इतनी लंबी सूची मिली थी कि उसे प्रबंधित करना एक बड़ी चुनौती बन गया था।

Frequently Asked Questions

1. सरकार ने OBC सूची का उपयोग करने से क्यों मना किया?
क्योंकि इन सूचियों में जातियों के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक और व्यावसायिक वर्गों का भी उल्लेख है जो तकनीकी रूप से 'जाति' की श्रेणी में नहीं आते।

2. 'ओपन-कॉलम' पद्धति क्या है?
यह एक ऐसी विधि है जहाँ व्यक्ति स्वयं अपनी जाति का नाम लिख सकता है, बजाय इसके कि उसे पहले से तय किसी सूची में से चुनना पड़े।