सरकार अधिकारियों द्वारा सोशल मीडिया पर रील और व्यक्तिगत राय साझा करने की बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए एक सख्त आचार संहिता लाने पर विचार कर रही है। इसका उद्देश्य सरकारी मर्यादा बनाए रखना और संवेदनशील सामग्री पर नियंत्रण पाना है।

  • सरकारी अधिकारियों के लिए सोशल मीडिया 'कोड ऑफ कंडक्ट' प्रस्तावित।
  • रील, वीडियो और व्यक्तिगत राय साझा करने पर लगेगी लगाम।
  • सभी रैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों पर लागू होगा नियम।
  • संवेदनशील सामग्री हटाने की समयसीमा को पहले ही कम किया जा चुका है।

भारत सरकार अपने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक व्यापक सोशल मीडिया आचार संहिता (Code of Conduct) लाने की तैयारी कर रही है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह कदम सरकारी सेवकों द्वारा इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स (पूर्व में ट्विटर) जैसे प्लेटफार्मों पर रील, वीडियो और व्यक्तिगत राय साझा करने की बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए उठाया जा रहा है।

क्यों बढ़ रही है सोशल मीडिया पर सख्ती?

हाल के महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहाँ सरकारी अधिकारी अपने पद और कार्य का महिमामंडन करने वाली सामग्री पोस्ट कर रहे हैं। सरकार का मानना है कि इस तरह के 'सेल्फ-प्रमोशनल' पोस्ट सरकारी सेवा की गरिमा के अनुकूल नहीं हैं। वर्तमान में, सरकारी कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर कोई स्पष्ट और सख्त नियम मौजूद नहीं हैं, जिसे देखते हुए यह नया प्रस्ताव लाया जा रहा है।

BozokMedia विश्लेषण: डिजिटल मर्यादा का संकट

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि जैसे-जैसे डिजिटल उपस्थिति बढ़ रही है, सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की व्यक्तिगत अभिव्यक्ति और उनके आधिकारिक कर्तव्यों के बीच की रेखा धुंधली होती जा रही है। सरकार का यह कदम न केवल अनुशासन बनाए रखने के लिए है, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए भी है कि सरकारी कर्मचारी किसी भी विवादित या अवांछनीय विषय पर अपनी राय व्यक्त करके संस्था की छवि को नुकसान न पहुँचाएँ।

सोशल मीडिया पर अधिकारियों की बढ़ती सक्रियता सरकारी तटस्थता और अनुशासन के लिए एक नई चुनौती बन गई है।

यह प्रस्तावित कोड सभी रैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों पर लागू होगा। हालांकि, सरकार ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि ये दिशा-निर्देश कब लागू होंगे और इनमें विस्तार से क्या प्रावधान शामिल होंगे।

ऐतिहासिक संदर्भ और आईटी नियम

यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब सरकार पहले से ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर नियंत्रण कड़ा कर रही है। फरवरी 2024 में, आईटी नियम 2021 में संशोधन किए गए थे ताकि डीपफेक और एआई-जनरेटेड सामग्री जैसे खतरों से निपटा जा सके। सरकार ने संवेदनशील सामग्री को हटाने की समयसीमा को 24 घंटे से घटाकर मात्र 2 घंटे कर दिया है।

विषयपुराना नियमनया नियम/प्रस्ताव
संवेदनशील सामग्री हटाना24 घंटे2 घंटे
शिकायत निवारण (संवेदनशील मामले)24 घंटे2 घंटे
सोशल मीडिया व्यवहारस्पष्ट नियम नहींकठोर आचार संहिता (प्रस्तावित)
Did You Know?: भारत सरकार ने हाल ही में एआई-जनरेटेड भ्रामक जानकारी को रोकने के लिए आईटी नियमों को और अधिक सख्त बना दिया है।

Frequently Asked Questions

1. क्या यह नियम केवल बड़े अधिकारियों के लिए है?
नहीं, सूत्रों के अनुसार यह कोड सभी रैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होने की संभावना है।

2. क्या अधिकारी अपनी निजी जिंदगी के बारे में पोस्ट कर सकेंगे?
नियमों का उद्देश्य निजी जीवन को रोकना नहीं, बल्कि 'अवांछनीय विषयों' और 'पद के महिमामंडन' को रोकना है।