गुड़गांव के एक दंपत्ति को 9 साल के लंबे संघर्ष के बाद बड़ी राहत मिली है। हरियाणा ररा (HARERA) ने राहेजा डेवलपर्स को आदेश दिया है कि वे रुके हुए प्रोजेक्ट के लिए ₹50.5 लाख ब्याज सहित वापस करें।

  • गुड़गांव के सेक्टर 84 स्थित 'राहेजा ट्रिनिटी' प्रोजेक्ट में दुकान के लिए ₹50 लाख से अधिक का भुगतान किया गया था।
  • HARERA ने बिल्डर के बचाव पक्ष को खारिज कर दिया क्योंकि उसने बार-बार सुनवाई में जवाब नहीं दिया।
  • बिल्डर को 10.8% वार्षिक ब्याज के साथ ₹50.5 लाख का रिफंड 90 दिनों के भीतर देने का आदेश दिया गया है।

गुड़गांव के रहने वाले रोहित सिंह और गरिमा सचन के लिए पिछले नौ साल किसी बुरे सपने से कम नहीं थे। साल 2017 में, जब उन्होंने अपने रिटायरमेंट के बाद आय के स्रोत के रूप में निवेश करने का फैसला किया, तो उन्हें राहेजा डेवलपर्स के सेल्स एग्जीक्यूटिव्स द्वारा 'राहेजा ट्रिनिटी' प्रोजेक्ट के सुनहरे भविष्य का सपना दिखाया गया था। उन्होंने सेक्टर 84 स्थित इस प्रोजेक्ट में एक दुकान के लिए ₹52 लाख का सौदा किया था।

दंपत्ति का आरोप है कि निर्माण कार्य शुरुआती चरणों के बाद कभी आगे नहीं बढ़ा। जब उन्होंने निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद साइट का दौरा किया, तो वहां केवल सन्नाटा और अधूरा निर्माण कार्य मिला। उन्होंने पाया कि बिल्डर ने 95% से अधिक भुगतान प्राप्त कर लिया था, लेकिन साइट पर काम पूरी तरह से ठप था।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेशकों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल है। यह दर्शाता है कि RERA (रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) अब उन बिल्डरों के खिलाफ सख्त रुख अपना रही है जो कानूनी प्रक्रियाओं से बचने का प्रयास करते हैं। जब बिल्डर सुनवाई में उपस्थित होकर भी लिखित जवाब देने से बचता है, तो प्राधिकरण उनके बचाव के अधिकार को छीन सकता है।

यह फैसला उन हजारों निवेशकों के लिए उम्मीद की किरण है जिनके पैसे अधूरी परियोजनाओं में फंसे हुए हैं।

हरियाणा ररा (HARERA) के अध्यक्ष अरुण कुमार ने आदेश देते हुए कहा कि खरीदारों को किसी भी रुके हुए प्रोजेक्ट से बाहर निकलने का 'बिना शर्त पूर्ण अधिकार' है। प्राधिकरण ने पाया कि बिल्डर ने जानबूझकर छह अलग-अलग सुनवाइयों के दौरान लिखित जवाब दाखिल नहीं किया, जिसके कारण उनके बचाव को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया।

न्यायालय ने आदेश दिया है कि राहेजा डेवलपर्स को ₹50,49,890 की पूरी राशि, प्रत्येक भुगतान की तारीख से 10.80% वार्षिक ब्याज के साथ, 90 दिनों के भीतर वापस करनी होगी। यह ब्याज दर एसबीआई के MCLR दर में 2% जोड़ने के बाद तय की गई है।

Historical Background

भारत में रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के लिए 2016 में RERA अधिनियम लागू किया गया था। इससे पहले, खरीदार बिल्डरों द्वारा प्रोजेक्ट में देरी करने या पैसा हड़पने के मामलों में अक्सर कानूनी पेचीदगियों में फंस जाते थे और उन्हें वर्षों तक न्याय का इंतजार करना पड़ता था।

Did You Know?: RERA के आने के बाद से, भारत में रियल एस्टेट परियोजनाओं के समय पर पूरा होने की दर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और खरीदारों के अधिकारों को कानूनी मजबूती मिली है।

Frequently Asked Questions

1. क्या खरीदार ब्याज की मांग कर सकते हैं?
हाँ, यदि बिल्डर समय पर कब्जा देने में विफल रहता है, तो RERA खरीदारों को ब्याज सहित रिफंड का अधिकार देता है।

2. यदि बिल्डर रिफंड देने से मना कर दे तो क्या होगा?
प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि आदेश का पालन न करने पर बिल्डर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।