केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने हिमालयी राज्यों के साथ बैठक कर ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट (GLOF) और हिमस्खलन से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने आपदा प्रबंधन में प्रतिक्रियात्मक दृष्टिकोण के बजाय निवारक शमन और मजबूत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली पर जोर दिया।

  • ग्लेशियर के फटने (GLOF) और हिमस्खलन के खतरों से निपटने के लिए राज्यों को सक्रिय निगरानी की आवश्यकता है।
  • नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ को तैयारियों में सुधार के लिए एक चेतावनी के रूप में लिया गया है।
  • प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और समुदाय स्तर की तत्परता को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है।
  • केंद्र ने 2024 में स्वीकृत GLOF शमन परियोजनाओं को तेजी से लागू करने का निर्देश दिया है।

केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने गुरुवार को हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड्स (GLOFs) और हिमस्खलन (snow avalanches) जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए राज्यों की तैयारियों की समीक्षा करना था। बैठक में विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते खतरों और सुरक्षा उपायों पर चर्चा की गई।

यह समीक्षा बैठक नेपाल में आई हालिया विनाशकारी बाढ़ के बाद आयोजित की गई है, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई और हजारों लोग लापता हो गए। नेपाल की इस आपदा ने हिमालयी देशों के लिए आपदा प्रबंधन की रणनीतियों पर पुनर्विचार करने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित किया है। बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिवों सहित NDMA, CWC और IMD के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

बदलता खतरा और नई चुनौतियां

अधिकारियों ने हिमालयी क्षेत्र में GLOFs से उत्पन्न होने वाले विकसित होते खतरों की समीक्षा की। इसमें संवेदनशील ग्लेशियर झीलों की निगरानी, उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान, संभावित प्रवाह पथों (flow paths) का मानचित्रण और अलर्ट जारी करने की प्रक्रिया में सुधार शामिल है। गृह सचिव ने स्पष्ट किया कि केवल आपदा आने के बाद प्रतिक्रिया देना पर्याप्त नहीं है; हमें जोखिम-आधारित योजना बनाने की आवश्यकता है।

आपदा प्रबंधन को केवल प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हमें निवारक शमन और सामुदायिक स्तर की तैयारी पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे नई ग्लेशियर झीलों का निर्माण हो रहा है। यदि इन झीलों के फटने से अचानक बाढ़ आती है, तो नीचे बसे गांवों और बुनियादी ढांचे को अपूरणीय क्षति हो सकती है। इसलिए, वैज्ञानिक संस्थानों और जिला प्रशासन के बीच समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण है।

गृह सचिव ने राज्यों को निर्देश दिया कि वे 2024 में स्वीकृत GLOF शमन परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा करें। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (Early Warning Systems) और अंतिम छोर तक संचार (last-mile communication) को इतना मजबूत बनाया जाना चाहिए कि चेतावनी मिलने पर सुरक्षित निकासी सुनिश्चित की जा सके।

Did You Know?: ग्लेशियर झीलों का फटना (GLOF) तब होता है जब एक प्राकृतिक बांध (बर्फ या मलबे से बना) टूट जाता है, जिससे झील का पानी अचानक नीचे की ओर बहने लगता है।

Frequently Asked Questions

1. GLOF क्या है?
GLOF का अर्थ है 'ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड', जो तब होता है जब ग्लेशियर के पास बनी झील का प्राकृतिक बांध टूट जाता है और अचानक बाढ़ आ जाती है।

2. किन राज्यों पर सबसे अधिक खतरा है?
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे हिमालयी राज्य इस खतरे के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं।