राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यम ने अधिकारियों द्वारा रिपोर्ट जमा करने में की जाने वाली देरी पर चिंता व्यक्त की है। गुजरात में आयोजित सुनवाई के दौरान आयोग ने पीड़ितों को 3.5 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया।

  • NHRC अध्यक्ष ने बताया कि अधिकारी नोटिस मिलने पर रिपोर्ट देने में देरी करते हैं, लेकिन व्यक्तिगत उपस्थिति के आदेश पर तुरंत रिपोर्ट पेश करते हैं।
  • गुजरात में दो दिवसीय सुनवाई के दौरान पीड़ितों को कुल 3.5 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का निर्णय लिया गया।
  • आयोग ने पुलिस और राजस्व विभागों में 'प्रणालीगत' नहीं बल्कि 'व्यक्तिगत' स्तर पर खामियों को मुख्य कारण बताया।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के अध्यक्ष, न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यम ने गुरुवार को सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया। गांधीनगर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि देश भर में एक ही पैटर्न देखा जा रहा है: जब भी आयोग 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (ATR) के लिए पहला नोटिस जारी करता है, तो अधिकारी निर्धारित दो से चार सप्ताह की समय सीमा के भीतर रिपोर्ट जमा नहीं करते हैं।

न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यम ने स्पष्ट किया कि आयोग को इस स्थिति से निपटने के लिए सख्त कदम उठाने पड़ते हैं। उन्होंने बताया, "जब रिपोर्ट नहीं मिलती, तो हम मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम की धारा 13(1) के तहत संबंधित अधिकारी को आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का नोटिस जारी करते हैं। जैसे ही उन्हें व्यक्तिगत उपस्थिति का आदेश मिलता है, वे तुरंत रिपोर्ट जमा कर देते हैं।"

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सरकारी विभागों में जवाबदेही की यह कमी मानवाधिकारों के त्वरित न्याय के मार्ग में एक बड़ी बाधा है। जब प्रशासनिक अधिकारी समय पर रिपोर्ट नहीं देते, तो संवेदनशील मामलों के निपटारे में महीनों का विलंब हो जाता है, जिससे पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी होती है।

प्रशासनिक देरी केवल कागजी कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों में न्याय को बाधित करने वाला एक गंभीर कारक है।

गुजरात में आयोजित इस दो दिवसीय खुली सुनवाई के दौरान, NHRC ने व्यापक स्तर पर राहत प्रदान की। आयोग ने बंधुआ मजदूरी, पुलिस दुर्व्यवहार और नागरिक लापरवाही से जुड़ी विभिन्न शिकायतों पर सुनवाई की। विशेष रूप से, दाहेज में एक रासायनिक संयंत्र में जहरीली गैस के कारण हुई चार श्रमिकों की मृत्यु के मामले में, आयोग ने उनके परिवारों को 2 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया। इसके अलावा, भरूच में एक कारखाने में आग लगने से हुई मौतों के मामले में भी मुआवजे की घोषणा की गई।

अमरेली के एक मामले में, जहाँ एक महिला की अवैध गिरफ्तारी और सार्वजनिक अपमान हुआ था, आयोग ने 7.5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यम ने कहा कि भले ही पुलिस ने अधिकारियों को निलंबित कर दिया हो, लेकिन महिला के साथ हुए अन्याय की भरपाई के लिए राज्य सरकार को 'विकैरियस लायबिलिटी' (प्रतिनिधिक दायित्व) के तहत भुगतान करना होगा।

Did You Know?: NHRC के पास मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए समन जारी करने की शक्ति है।

Frequently Asked Questions

1. NHRC अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से बुलाने के लिए किस कानून का उपयोग करता है?
NHRC मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम की धारा 13(1) का उपयोग करता है।

2. क्या राज्य सरकार मुआवजा देने के बाद अधिकारियों से वसूली कर सकती है?
हाँ, आयोग ने राज्य को यह स्वतंत्रता दी है कि वह मुआवजे की राशि संबंधित दोषी अधिकारियों से वसूल सके।