नासा के मेसेंजर और यूरोपीय-जापानी बिपीकोलंबो, दो दशकों की यात्रा के बाद, अब मरकरी के बहुत करीब पहुँच चुके हैं, जिससे ग्रह के रहस्यों को उजागर करने की संभावनाएँ बढ़ गई हैं।
- नासा का मेसेंजर 2011 में मरकरी पर सफलतापूर्वक पहुँचा।
- बिपीकोलंबो 2018 में लॉन्च हुआ और 2025 में ग्रह के निकट आएगा।
- दोनों मिशन वैज्ञानिकों को मरकरी की सतह और वातावरण के बारे में नई जानकारी देंगे।
नासा का मेसेंजर अंतरिक्ष यान 2004 में लॉन्च हुआ और सात साल की यात्रा के बाद 2011 में मरकरी के निकट पहुँचा, जहाँ उसने ग्रह की सतह, चुंबकीय क्षेत्र और तापीय गुणों का विस्तृत अध्ययन किया। इस मिशन ने 4,500 से अधिक तस्वीरें और 200 मिलियन डेटा बिंदु प्रदान किए।
बिपीकोलंबो, यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) और जापान की JAXA का संयुक्त मिशन, 2018 में लॉन्च हुआ और लगभग सात साल की जटिल ग्रैविटेशनल स्लिंगशॉट यात्रा के बाद अब मरकरी के 2,600 किमी दूरी पर है। यह यान दो प्रोब, माईर (मर्लिन) और बायो (बायो) से मिलकर बना है, जो ग्रह की सतह, कोर और बाहरी अंतरिक्ष को एक साथ अध्ययन करेंगे।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि दो अलग-अलग तकनीकी दृष्टिकोणों वाले मिशन एक साथ काम करने से मरकरी के भूवैज्ञानिक इतिहास, सूर्य के निकट स्थित ग्रहों के वातावरण, और सौर मंडल के प्रारंभिक चरणों की समझ में क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है।
"बिपीकोलंबो की दोहरी प्रोब संरचना हमें मरकरी के कोर के आकार और संरचना को पहले से अधिक सटीकता से मापने की अनुमति देती है," कहा गया है अंतरिक्ष विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. एलेना रॉबर्ट्स ने।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: मेसेंजर ने मरकरी के कौन से प्रमुख रहस्य उजागर किए?
उत्तर: इसने ग्रह की अत्यधिक तापीय अंतर, पतली वायुमंडलीय संरचना और एक कमजोर चुंबकीय क्षेत्र की पुष्टि की।
प्रश्न 2: बिपीकोलंबो के मुख्य वैज्ञानिक लक्ष्य क्या हैं?
उत्तर: यह ग्रह के कोर की संरचना, सतह की रसायन विज्ञान, और सूर्य के निकट अंतरिक्ष में कणों के प्रभाव को समझने पर केंद्रित है।