फरीदाबाद की अचीवर्स सोसाइटी में करोड़ों की संपत्ति होने के बावजूद 500 परिवार दो दशकों से पानी के लिए निजी टैंकरों पर निर्भर हैं। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने इस गंभीर मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन को तत्काल मुफ्त पानी उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।

  • फरीदाबाद की अचीवर्स सोसाइटी में पिछले 20 वर्षों से नगर निगम का पानी नहीं पहुँचा है।
  • करोड़ों रुपये के विला और फ्लोर होने के बावजूद निवासी निजी टैंकरों पर निर्भर हैं।
  • हरियाणा मानवाधिकार आयोग (HHRC) ने प्रशासन को मुफ्त सरकारी टैंकर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
  • भूजल स्तर गिरने और बोरवेल सूखने से समस्या और गंभीर हो गई है।

हरियाणा के फरीदाबाद में शहरी विकास के दावों की पोल खोलती एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। सेक्टर 49, कालंदी हिल स्थित अचीवर्स सोसाइटी, जो बाहर से देखने में एक आधुनिक और आलीशान कॉलोनी लगती है, वहां के निवासी पिछले 20 वर्षों से बुनियादी जरूरत—साफ पानी—के लिए तरस रहे हैं। ₹2 करोड़ से ₹4 करोड़ की कीमत वाले इन घरों में रहने वाले परिवारों को अपनी दैनिक जरूरतों के लिए पूरी तरह से निजी पानी के टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है।

वर्ष 2004 में टाउन प्लानिंग स्कीम के तहत विकसित इस कॉलोनी में कभी भी नगर निगम का जल नेटवर्क स्थापित नहीं किया गया। निवासियों के अनुसार, शुरुआत में बोरवेल से पानी मिल जाता था, लेकिन धीरे-धीरे भूजल स्तर गिरने के कारण वे भी सूख गए। स्थिति इतनी खराब है कि भीषण गर्मी के दौरान सोसाइटी में प्रतिदिन 90 से 100 निजी टैंकरों का आना पड़ता है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह मामला केवल एक स्थानीय जल संकट नहीं है, बल्कि यह शहरी नियोजन (Urban Planning) की विफलता और बुनियादी मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक गंभीर उदाहरण है। जब करोड़ों का निवेश करने वाले नागरिक भी एक बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष करते हैं, तो यह प्रशासन की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करता है।

'सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल की कमी जीवन के अधिकार का सीधा उल्लंघन है, जो मानव गरिमा का एक अनिवार्य हिस्सा है।'

इस संकट ने अब कानूनी रूप ले लिया है। हरियाणा मानवाधिकार आयोग (HHRC) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम फरीदाबाद (MCF) और फरीदाबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (FMDA) को कड़े निर्देश दिए हैं। आयोग ने आदेश दिया है कि जब तक स्थायी समाधान नहीं हो जाता, तब तक सरकार द्वारा मुफ्त और निर्बाध पानी के टैंकरों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

निवासियों का कहना है कि पानी की गुणवत्ता भी अत्यंत खराब है। पूर्व आरडब्ल्यूए अध्यक्ष सुरेंद्र कौल ने बताया कि जो थोड़ा-बहुत भूजल उपलब्ध है, वह मटमैला है और उसका TDS स्तर 2,000 के आसपास है, जबकि सामान्य स्तर 50 से 300 ppm के बीच होना चाहिए। इस समस्या के कारण कई परिवार अपने घर बेचने को मजबूर हो रहे हैं।

Did You Know?: हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा 267 के तहत, किसी योजना को मंजूरी मिलने के पांच साल के भीतर नागरिक निकायों को पानी जैसी बुनियादी सेवाएं प्रदान करना अनिवार्य है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: अचीवर्स सोसाइटी के निवासी पानी के लिए क्या कर रहे हैं?
उत्तर: निवासी पिछले दो दशकों से निजी टैंकरों से पानी खरीद रहे हैं, जिसके लिए उन्हें भारी शुल्क देना पड़ता है।

प्रश्न 2: मानवाधिकार आयोग ने क्या आदेश दिया है?
उत्तर: आयोग ने MCF और FMDA को आदेश दिया है कि वे स्थायी व्यवस्था होने तक निवासियों को मुफ्त सरकारी टैंकरों से पानी उपलब्ध कराएं।