पूर्व टेलीविजन पत्रकार एच. रामकृष्णन ने 1951 के मद्रास और आज के आधुनिक चेन्नई के बीच के बड़े बदलावों को अपनी यादों के माध्यम से साझा किया है।
- 1951 का मद्रास एक शांत कस्बे जैसा था, जहाँ ट्राम और पेड़ों से घिरी सड़कें हुआ करती थीं।
- समय के साथ शहर में वाहनों की संख्या बढ़ी और ट्राम का अस्तित्व समाप्त हो गया।
- आधुनिकता के बावजूद, लेखक का चेन्नई के प्रति गहरा प्रेम बरकरार है।
पूर्व टेलीविजन पत्रकार एच. रामकृष्णन ने एक बेहद भावुक लेख के माध्यम से मद्रास (अब चेन्नई) के उस दौर को जीवंत किया है, जो अब केवल स्मृतियों में शेष है। उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत 1951 से की, जब वे मात्र 10 वर्ष के थे। उस समय का मद्रास आज के हलचल भरे महानगर से बिल्कुल अलग, एक शांत और हरियाली से भरे कस्बे जैसा महसूस होता था।
रामकृष्णन बताते हैं कि उस दौर में ट्राम का सफर एक रोमांचक अनुभव था। सड़कें कच्ची और संकरी थीं, और दोनों ओर पेड़ों की कतारें शहर को एक प्राकृतिक सुंदरता प्रदान करती थीं। आज के शोर-शराबे वाले यातायात के विपरीत, उस समय 'प्लेज़र कारें' (कारें) बहुत कम दिखाई देती थीं और बसें भी बहुत कम अंतराल पर चलती थीं।
बदलती जीवनशैली और शहरीकरण
1960 के दशक की शुरुआत में जब वे स्थायी निवासी बने, तो उन्होंने शहर के सामाजिक और आर्थिक ढांचे में बदलाव देखे। तिरुवल्लिक्केनी में पायक्रोफ्ट्स रोड पर उनके प्रवास के दौरान, शहर का जीवन बहुत सरल और सामुदायिक था। वे याद करते हैं कि कैसे सुबह 6 बजे दूधवाले गाय और बछड़े के साथ घर आते थे, और फल-सब्जी विक्रेता प्रतिदिन नियमित रूप से उपस्थिति दर्ज कराते थे।
बोहारी (Buhari) जैसे प्रतिष्ठित स्थानों पर आधी रात के बाद आइसक्रीम खाना और सिनेमा देखना उस समय की संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा था। 1962 के आसपास, भोजन की कीमतें भी आज की तुलना में बेहद कम थीं; उदाहरण के लिए, सिदोजी मेस में मात्र 10-12 रुपये में भोजन मिल जाता था।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि शहरीकरण की प्रक्रिया अक्सर सांस्कृतिक पहचान और जीवन की गति को बदल देती है। रामकृष्णन का वृत्तांत केवल एक व्यक्ति की यादें नहीं हैं, बल्कि यह भारत के तीव्र शहरीकरण और 'मद्रास' से 'चेन्नई' बनने की विकास यात्रा का एक ऐतिहासिक दस्तावेज है।
"महानगरों का विकास अक्सर उनकी आत्मा के एक हिस्से को पीछे छोड़ देता है, लेकिन स्मृतियाँ उस पहचान को जीवित रखती हैं।"
आज का चेन्नई एक 'मैकेनिकल' या यांत्रिक महानगर बन चुका है, जहाँ जीवन की गति बहुत तेज है। फिर भी, रामकृष्णन का यह कहना कि 'मैं चेन्नई को वैसा ही प्यार करता हूँ जैसा वह है', इस शहर की अटूट भावना और लचीलेपन को दर्शाता है।
Frequently Asked Questions
1. एच. रामकृष्णन कौन हैं?
वे एक पूर्व टेलीविजन पत्रकार हैं जिन्होंने मद्रास के ऐतिहासिक विकास पर अपने अनुभव साझा किए हैं।
2. मद्रास का नाम चेन्नई कैसे पड़ा?
मद्रास ऐतिहासिक नाम है जिसे बाद में आधिकारिक तौर पर चेन्नई में बदल दिया गया, जो शहर के आधुनिक स्वरूप को दर्शाता है।