एक दुखद त्रासदी के बाद परिवार को फिर से बसाने की कोशिश कर रहे गुजरात के एक दंपत्ति को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उम्र की सीमा के आधार पर IVF उपचार को रोकने के फैसले को पलट दिया है।
- गुजरात हाई कोर्ट ने उम्र सीमा के आधार पर IVF उपचार देने से इनकार करने के फैसले को रद्द किया।
- अदालत ने कहा कि यदि एक साथी कानूनी आयु सीमा के भीतर है, तो दंपत्ति उपचार के लिए पात्र है।
- यह फैसला उन दंपत्तियों के लिए एक बड़ी उम्मीद है जो आयु संबंधी कानूनी बाधाओं का सामना कर रहे हैं।
गुजरात के एक दंपत्ति, जिन्होंने अपने 25 वर्षीय डॉक्टर बेटे को आत्महत्या के कारण खो दिया था, ने अपनी पारिवारिक खुशियों को फिर से तलाशने के लिए एक लंबी कानूनी लड़ाई जीती है। गुजरात हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में दंपत्ति को IVF (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन) उपचार प्राप्त करने की अनुमति देते हुए उम्र संबंधी बाधाओं को हटा दिया है।
मामला तब शुरू हुआ जब मेहसाणा के एक क्लिनिक ने दंपत्ति को उपचार देने से मना कर दिया क्योंकि महिला की आयु 50 वर्ष से अधिक हो गई थी। असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 की धारा 21(g) के तहत, महिलाओं के लिए आयु सीमा 21 से 50 वर्ष और पुरुषों के लिए 21 से 55 वर्ष निर्धारित है। चूंकि पत्नी 50 वर्ष की सीमा पार कर चुकी थी, इसलिए अधिकारियों ने उनके आवेदन को खारिज कर दिया था।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह फैसला भारत में प्रजनन अधिकारों और कानून की व्याख्या के संदर्भ में एक मील का पत्थर है। यह मामला स्पष्ट करता है कि कानून को 'कमीशनिंग कपल' (वह विवाहित जोड़ा जो उपचार चाहता है) के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि केवल व्यक्तिगत आयु के आधार पर। यह निर्णय भविष्य में ऐसे हजारों मामलों के लिए रास्ता खोलता है जहाँ एक साथी की आयु सीमा समाप्त होने के कारण पूरा परिवार चिकित्सा सहायता से वंचित रह जाता है।
अदालत का यह रुख व्यक्ति केंद्रित कानून के बजाय परिवार केंद्रित दृष्टिकोण को प्राथमिकता देता है।
न्यायमूर्ति निरज़ार एस. देसाई ने अपने 17 पन्नों के फैसले में कहा कि अन्य उच्च न्यायालयों के पिछले फैसलों को देखते हुए, दंपत्ति की याचिका को स्वीकार किया जाना चाहिए। अदालत ने नोट किया कि प्रतिवादी पक्ष ऐसा कोई निर्णय पेश नहीं कर सका जो इस तर्क के विपरीत हो।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
वर्ष 2022 में, इस दंपत्ति का बेटा, जो जयपुर में स्नातकोत्तर चिकित्सा अध्ययन कर रहा था, ने आत्महत्या कर ली थी। इस गहरे दुख के बाद, दंपत्ति ने एक नया जीवन शुरू करने का निर्णय लिया। कानूनी लड़ाई का मुख्य आधार यह था कि यदि पति (जो 54 वर्ष के हैं) अभी भी कानूनी आयु सीमा (55 वर्ष) के भीतर है, तो पत्नी की आयु के कारण पूरे दंपत्ति को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।
अदालत ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के एक मिसाल का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि जब तक प्रतिबंध दोनों साथियों पर लागू नहीं होता, तब तक कोई बाधा नहीं है।
Frequently Asked Questions
1. क्या उम्र सीमा के कारण IVF उपचार से इनकार किया जा सकता है?
कानून के अनुसार आयु सीमाएं हैं, लेकिन हालिया अदालती फैसलों के अनुसार, यदि एक साथी पात्र है, तो दंपत्ति को उपचार मिल सकता है।
2. गुजरात हाई कोर्ट ने इस मामले में क्या तर्क दिया?
अदालत ने कहा कि 'कमीशनिंग कपल' की पात्रता को व्यक्तिगत रूप से नहीं, बल्कि जोड़े के रूप में देखा जाना चाहिए।