कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने एच.ए.एल. एयरपोर्ट पर क्लाउड सीडिंग कार्यक्रम का आधिकारिक आरम्भ किया। यह पहल सूखा-ग्रस्त क्षेत्र में पानी की कमी को कम करने के उद्देश्य से 28.5 करोड़ रुपये के बजट के साथ शुरू की गई है।
- क्लाउड सीडिंग का लक्ष्य सूखा-ग्रस्त जिलों में वर्षा बढ़ाना है।
- कुल लागत 28.5 करोड़ रुपये (GST वगळे) और दो विशेषज्ञ समितियों द्वारा निगरानी।
- सिल्वर आयोडाइड, पोटैशियम आयोडाइड और नमक जैसी रसायन प्रयोग किए जाएंगे।
कर्नाटक सरकार ने आज एच.ए.एल. एयरपोर्ट पर जल संसाधन मंत्री एन. चलुवरायस्वामी के नेतृत्व में क्लाउड सीडिंग कार्यक्रम का आधिकारिक आरम्भ किया। यह पहल राज्य में लगातार घटती वर्षा और संभावित गंभीर सूखे की चेतावनी के बीच की गई है।
मंत्रियों ने 28.5 करोड़ रुपये के अनुमानित बजट के साथ इस परियोजना को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया, जिसमें राज्य जल संसाधन विभाग और प्राकृतिक आपदा प्रबंधन केंद्र मिलकर कार्यान्वयन करेंगे।
क्लाउड सीडिंग एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें वायुमंडलीय नमी को बढ़ाने के लिए रासायनिक एजेंटों का उपयोग किया जाता है। सिल्वर आयोडाइड, पोटैशियम आयोडाइड और सोडियम क्लोराइड जैसी रसायनों को विशेष विमानों द्वारा लक्षित बादलों में फैलाया जाता है।
सर्वेक्षण के अनुसार, पिछली बार की क्लाउड सीडिंग में 35% सफलता दर प्राप्त हुई थी, और यह सरकार का उद्देश्य है कि इस परियोजना से किसानों और ग्रामीण समुदायों को लाभ मिले।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, कर्नाटक की जल संकट से निपटने के लिए यह पहल एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। यदि सफल रही, तो यह अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकता है।
“क्लाउड सीडिंग से वर्षा में वृद्धि की संभावना 20-30% तक हो सकती है, यदि मौसम की स्थितियाँ अनुकूल हों।” – डॉ. राधिका शुक्ला, मौसम विज्ञानी।
Frequently Asked Questions
Q1: क्लाउड सीडिंग का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ता है?
A1: रासायनिक एजेंटों का सीमित उपयोग होता है और आम तौर पर यह पर्यावरण के लिए सुरक्षित माना जाता है।
Q2: क्या यह कार्यक्रम केवल कर्नाटक में ही लागू होगा?
A2: वर्तमान में यह कार्यक्रम कर्नाटक के लिए विशेष है, परंतु सफल होने पर इसे अन्य राज्यों में भी विस्तारित किया जा सकता है।