मुल्लापेरियार बांध का जल स्तर 121.95 फीट पर पहुँच गया है, अधिकतम अनुमत सीमा से 20 फीट नीचे। इस दौरान 239 क्यूज़ेक्स की प्रवाह और 800 क्यूज़ेक्स का निर्वहन हुआ, जबकि वैगैई बांध 38.54 फीट पर स्थिर है।
- मुल्लापेरियार का जल स्तर 121.95 फीट
- प्रवाह 239 क्यूज़ेक्स, निर्वहन 800 क्यूज़ेक्स
- विगत 24 घंटे में क्षेत्रीय वर्षा 12.8 मिमी तक
मुल्लापेरियार बांध का जल स्तर 4 सितंबर 2026 को 121.95 फीट पर स्थिर हुआ, जबकि अधिकतम अनुमत सीमा 142 फीट है। इस आंकड़े से पता चलता है कि बांध की क्षमता अभी भी सुरक्षित सीमा के भीतर है, परंतु भविष्य में वर्षा के बढ़ने पर स्थिति बदल सकती है।
इसी समय, वैगैई बांध का स्तर 38.54 फीट रहा, जो 71 फीट की अधिकतम सीमा से काफी नीचे है। दोनों बांधों के लिए 24 घंटे के भीतर दर्ज की गई वर्षा थानियामंगलम में 16 मिमी से लेकर इदायापट्टि में 1 मिमी तक रही।
इतिहास और पृष्ठभूमि
मुल्लापेरियार बांध, जिसे 1895 में ब्रिटिश भारत के दौरान बनाया गया था, दक्षिण भारत के जल प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह बांध तमिलनाडु के पेरियार नदी पर स्थित है और इसके जल स्तर का निरीक्षण लगातार किया जाता है क्योंकि यह क्षेत्र में कृषि और घरेलू जल आपूर्ति के लिए आवश्यक है।
क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, मुल्लापेरियार का बढ़ता जल स्तर आगामी मानसून के दौरान क्षेत्र की जल सुरक्षा पर सीधा प्रभाव डाल सकता है। यदि वर्षा बढ़ती है तो बांध को अतिरिक्त निर्वहन की आवश्यकता होगी, जिससे आसपास के गांवों और कृषि भूमि पर जोखिम बढ़ सकता है।
"बांध का वर्तमान स्तर सामान्य है, परंतु लगातार बढ़ती वर्षा के कारण भविष्य में जल स्तर में तेज़ बदलाव हो सकता है," कहते हैं जल संसाधन विशेषज्ञ डॉ. रवि शंकर।
बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: क्या मुल्लापेरियार बांध में पानी का स्तर बढ़ने से आस-पास के इलाकों पर असर पड़ेगा?
उत्तर 1: हाँ, अगर जल स्तर 142 फीट की सीमा के करीब पहुँचता है तो अतिरिक्त पानी को निर्वहन करना पड़ेगा, जिससे निम्न स्तर के क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं।
प्रश्न 2: वैगैई बांध का जल स्तर क्यों इतना कम है?
उत्तर 2: वैगैई बांध की भौगोलिक स्थिति और कम वर्षा के कारण यह वर्तमान में कम स्तर पर है, परंतु आगामी मानसून के दौरान यह बढ़ सकता है।