एक अनुभवी पत्रकार ने 'द हिंदू' के हैदराबाद संस्करण के 50 वर्षों के सफर और शहर के बदलते स्वरूप को याद किया। बेगमपेट के सुनसान इलाकों से लेकर एक आधुनिक कॉर्पोरेट न्यूज़रूम तक की यह यात्रा बेहद भावुक और प्रेरणादायक है।

  • 'द हिंदू' के हैदराबाद संस्करण ने 1976 में बेगमपेट से अपनी शुरुआत की थी।
  • प्रसिद्ध संपादक जी. कस्तूरी ने इस संस्करण को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • समाचार कक्ष का विकास हैदराबाद शहर के शहरीकरण और आधुनिकीकरण का प्रतिबिंब है।

जब 'द हिंदू' ने अपने हैदराबाद संस्करण की स्वर्ण जयंती के अवसर पर एक पुरानी यादों से भरी लेख लिखने का आग्रह किया, तो यह केवल एक पत्रकार के लिए कार्य नहीं, बल्कि एक भावुक यात्रा थी। अनुभवी पत्रकार दास केशव राव ने पिछले ढाई दशकों के अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि कैसे यह समाचार पत्र हैदराबाद के बदलते स्वरूप का गवाह बना है।

बेगमपेट के सुनसान दिनों की यादें

अगस्त 1976 में, जब हैदराबाद संस्करण पहली बार बेगमपेट में शुरू हुआ, तब वहां का दृश्य आज से बिल्कुल अलग था। जी. पुल्ला रेड्डी की जमीन पर बना यह कार्यालय उस समय के सुनसान इलाके में एक अकेला स्तंभ था। आसपास न तो बड़ी दुकानें थीं और न ही होटल। पत्रकारों के लिए एकमात्र सहारा 'फ्रेंड्स कैफे' था, जहां चाय और बिस्कुट के साथ महत्वपूर्ण चर्चाएं होती थीं।

उस समय का वातावरण आज के कॉर्पोरेट युग से कोसों दूर था। कार्यालय के प्रवेश द्वार पर दो विशाल पेड़ प्रहरी की तरह खड़े रहते थे, जिन्हें बाद में सड़क चौड़ीकरण के दौरान काट दिया गया। उस दौर में कार्यालय में केवल पुरुष ही कार्यरत थे, और काम करने का तरीका पूरी तरह से पारंपरिक था।

संपादकीय उत्कृष्टता और तकनीकी विकास

पूर्व संपादक जी. कस्तूरी का इस संस्करण के विकास में व्यक्तिगत योगदान अतुलनीय था। वे सुबह 10 बजे से लेकर आधी रात तक कार्यालय में मौजूद रहते थे ताकि पहली छपाई सुनिश्चित हो सके। उस समय फ्रांसीसी इंजीनियरों की एक टीम प्रिंटिंग मशीनरी स्थापित करने के लिए मौजूद रहती थी, जो स्थानीय कर्मचारियों के साथ मिलकर काम करती थी।

'द हिंदू' का हैदराबाद में सफर केवल एक समाचार पत्र का विस्तार नहीं, बल्कि शहर के विकास की एक जीवंत गाथा है।

जैसे-जैसे दशक बीते, कार्यालय का स्वरूप भी बदलता गया। 1980 के दशक के अंत में विस्तार के लिए एक और मंजिल जोड़ी गई। एक समय ऐसा भी आया जब कार्यालय का नवीनीकरण चल रहा था और पत्रकार हथौड़ों और ट्रकों के शोर के बीच काम करने को मजबूर थे।

बदलते शहर के साथ बदलता न्यूज़रूम

21वीं सदी की शुरुआत के साथ, बेगमपेट की सड़कों पर एक्सिस बैंक और होटल ग्रैंड काकाटिया जैसे बड़े प्रतिष्ठान नजर आने लगे। इसके साथ ही, 'द हिंदू' का कार्यालय भी एक आधुनिक कॉर्पोरेट ऑफिस में बदल गया, जहां केबिन, क्यूबिकल्स और मेट्रोप्लस जैसे विशेष खंडों की शुरुआत हुई।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि किसी भी मीडिया संस्थान का विकास केवल तकनीक पर नहीं, बल्कि उस सामाजिक और शहरी परिवेश पर भी निर्भर करता है जिसमें वह पनपता है। 'द हिंदू' का इतिहास हैदराबाद के शहरी विस्तार और सूचना क्रांति के बीच के गहरे संबंध को दर्शाता है।

Did You Know?: 'द हिंदू' के हैदराबाद संस्करण की शुरुआत के समय, प्रिंटिंग प्रेस में मदद के लिए फ्रांसीसी इंजीनियरों की एक विशेष टीम तैनात की गई थी।

Frequently Asked Questions

1. 'द हिंदू' का हैदराबाद संस्करण कब शुरू हुआ था?
यह संस्करण अगस्त 1976 में बेगमपेट से शुरू हुआ था।

2. इस लेख के लेखक कौन हैं?
यह लेख पूर्व ब्यूरो प्रमुख और उप संपादक दास केशव राव द्वारा लिखा गया है।