भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के लिए अमेरिका की प्रसिद्ध 'जवलिन' एंटी-टैंक मिसाइल प्रणाली को खरीदने की योजना बना रहा है। यह कदम भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

  • भारत अमेरिका से उन्नत जवलिन एंटी-टैंक मिसाइल प्रणाली खरीदने की तैयारी कर रहा है।
  • टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) के साथ मिलकर भारत में ही इसके उत्पादन की योजना है।
  • जवलिन एक 'फायर-एंड-फॉरगेट' मिसाइल है, जो टैंकों और बंकरों को नष्ट करने में सक्षम है।

भारत अपनी सैन्य शक्ति को आधुनिक बनाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने हाल ही में पुष्टि की है कि भारत विश्व प्रसिद्ध जवलिन (Javelin) एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) प्रणाली को हासिल करने की योजना बना रहा है। यह निर्णय न केवल भारत की युद्धक क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग के एक नए युग की शुरुआत भी करेगा।

जवलिन क्या है और यह इतना खास क्यों है?

जवलिन, जिसे रेथियॉन (Raytheon) और लॉकहीड मार्टिन (Lockheed Martin) के संयुक्त उद्यम द्वारा विकसित किया गया है, एक बहुमुखी और पोर्टेबल हथियार प्रणाली है। यह एक 'फायर-एंड-फॉरगेट' मिसाइल है, जिसका अर्थ है कि एक बार लॉन्च होने के बाद, मिसाइल अपने लक्ष्य को स्वयं ढूंढ लेती है और उस पर हमला करती है, जिससे सैनिक को तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाने की अनुमति मिलती है। इसमें एक कमांड लॉन्च यूनिट (CLU) और एक मिसाइल शामिल होती है, जो दिन और रात दोनों समय सटीक निशाना लगाने में सक्षम है।

युद्धक्षेत्र में जवलिन का प्रदर्शन

जवलिन ने इराक, अफगानिस्तान और विशेष रूप से यूक्रेन युद्ध में अपनी शक्ति का लोहा मनवाया है। यूक्रेन में रूसी टैंकों के खिलाफ इसके सफल उपयोग ने इसे आधुनिक युद्ध का एक 'आइकन' बना दिया है। इसकी सफलता दर 94% है और परिचालन तत्परता 99% तक है। यह मिसाइल टैंकों के ऊपरी हिस्से पर हमला करने (top-attack mode) के साथ-साथ बंकरों और अन्य स्थिर लक्ष्यों को भी नष्ट कर सकती है।

भारत में स्थानीय उत्पादन की राह

इस सौदे की सबसे बड़ी विशेषता इसका सह-उत्पादन (co-production) मॉडल है। एक समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) जवलिन के 'ऑल अप राउंड्स' (AURs) का भारत में अंतिम संयोजन करेगी। हालांकि मुख्य घटक अमेरिका से आएंगे, लेकिन भारत में असेंबली होने से 'मेक इन इंडिया' पहल को मजबूती मिलेगी।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह सौदा भारत की रक्षा रणनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है। 15 वर्षों से अधिक समय तक तकनीक हस्तांतरण के मुद्दों से जूझने के बाद, भारत अब एक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपना रहा है। यह कदम भारत की स्वदेशी मिसाइल विकास क्षमताओं के साथ-साथ तत्काल युद्धक आवश्यकताओं के बीच एक संतुलन बनाने का प्रयास है।

जवलिन का आगमन भारतीय सेना की टैंक-रोधी क्षमताओं को एक नए स्तर पर ले जाएगा, जिससे सीमाओं पर सुरक्षा और अधिक अभेद्य हो जाएगी।
Did You Know?: जवलिन मिसाइल को चलाने के लिए केवल 72 घंटों के प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है, जिससे यह सैनिकों के लिए अत्यधिक प्रभावी बन जाती है।

Frequently Asked Questions

1. जवलिन मिसाइल का मुख्य उपयोग क्या है?
इसका मुख्य उपयोग दुश्मन के टैंकों, बंकरों और अन्य भारी सैन्य उपकरणों को सटीक रूप से नष्ट करने के लिए किया जाता है।

2. क्या यह भारत में बनाई जाएगी?
पूरी तरह से नहीं, लेकिन टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के माध्यम से भारत में इसके अंतिम संयोजन (Final Assembly) की प्रक्रिया की जाएगी।