तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग ने प्राचीन बंदरगाह शहर पूम्पुहार के तट पर तीसरे चरण का समुद्री अन्वेषण शुरू किया है। यह अभियान प्राचीन तमिल समुद्री व्यापार मार्गों के रहस्यों को उजागर करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- तमिलनाडु पुरातत्व विभाग (TNSDA) ने पूम्पुहार तट पर तीसरे चरण का समुद्री अन्वेषण शुरू किया।
- यह अभियान समुद्र की धाराओं और उत्तर-पूर्वी मानसून को ध्यान में रखकर 20 दिनों के लिए निर्धारित है।
- उद्देश्य प्राचीन तमिल सभ्यता के समुद्री व्यापारिक संबंधों का पता लगाना है।
तमिलनाडु के मयिलादुथुराई जिले में स्थित प्राचीन बंदरगाह शहर पूम्पुहार (जिसे कभी कावेरीपूमपट्टिनम के नाम से जाना जाता था) के तट पर एक ऐतिहासिक खोज का आगाज़ हुआ है। तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग (TNSDA) ने रविवार को तीसरे चरण के समुद्री पुरातात्विक अन्वेषण की आधिकारिक शुरुआत की। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य प्राचीन तमिलों के वैश्विक समुद्री व्यापार संबंधों के प्रमाण खोजना है।
इस महत्वपूर्ण अभियान का शुभारंभ स्कूल शिक्षा और पुरातत्व मंत्री राजमोहन ने किया। उनके साथ पुरातत्व निदेशक वी.पी. जयसीलन, प्रसिद्ध पुरातत्वविद् के. राजन और अन्य विशेषज्ञ भी मौजूद थे। अभियान की गंभीरता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि मंत्री राजमोहन और निदेशक जयसीलन ने स्वयं प्रशिक्षित गोताखोरों के साथ समुद्र में डुबकी लगाकर प्रारंभिक सर्वेक्षण किया।
अन्वेषण की तकनीकी चुनौतियाँ
निदेशक वी.पी. जयसीलन के अनुसार, टीम एक यांत्रिक नाव के माध्यम से समुद्र में लगभग दो किलोमीटर दूर गई और संरचनाओं की तलाश के लिए 10 मीटर की गहराई तक गोता लगाया। हालांकि, समुद्र के भीतर दृश्यता (visibility) काफी सीमित थी, जिससे काम चुनौतीपूर्ण हो गया है। विशेषज्ञों ने समुद्र की धाराओं के पैटर्न और आगामी उत्तर-पूर्वी मानसून को देखते हुए इस पूरे अन्वेषण कार्य के लिए लगभग 20 दिनों का समय निर्धारित किया है।
यह अन्वेषण केवल वस्तुओं की खोज नहीं है, बल्कि यह हमारी प्राचीन समुद्री विरासत को पुनर्जीवित करने का एक प्रयास है।
BozokMedia विश्लेषण: क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज?
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि पूम्पुहार का महत्व केवल स्थानीय नहीं, बल्कि वैश्विक है। संगम काल के साहित्यिक ग्रंथों जैसे पट्टिनप्पालाई, सिलप्पादिकारम और मणिमेकलई में इस शहर का विस्तृत वर्णन मिलता है। ये ग्रंथ बताते हैं कि पूम्पुहार का व्यापार श्रीलंका, दक्षिण-पूर्व एशिया और पश्चिमी देशों के साथ अत्यंत सुदृढ़ था। यह खोज उन ऐतिहासिक कड़ियों को जोड़ने में मदद करेगी जो सदियों से समुद्र की गहराइयों में दबी हुई हैं।
ऐतिहासिक रूप से, पिछले प्रशासन के दौरान सितंबर 2025 में भी एक सर्वेक्षण किया गया था। उस समय भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय के सहयोग से उन्नत उपकरणों जैसे रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV), साइड-स्कैन सोनार और मल्टीबीम स्कैनर का उपयोग किया गया था। वर्तमान सरकार द्वारा इस अभियान को जारी रखना सांस्कृतिक विरासत के प्रति निरंतरता को दर्शाता है।
अन्वेषण का तुलनात्मक विवरण
| विशेषता | पिछला चरण (2025) | वर्तमान चरण (2026) |
|---|---|---|
| सहयोगी संस्थान | भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय | TNSDA एवं विशेषज्ञ दल |
| मुख्य तकनीक | ROV, सोनार, मल्टीबीम स्कैनर | मानव गोताखोर एवं उन्नत मैपिंग |
| मुख्य लक्ष्य | समुद्र तल का मानचित्रण | संरचनाओं और व्यापारिक अवशेषों की खोज |
Frequently Asked Questions
1. यह अन्वेषण कहाँ किया जा रहा है?
यह अन्वेषण तमिलनाडु के मयिलादुथुराई जिले में पूम्पुहार तट पर किया जा रहा है।
2. इस अभियान में किन साहित्यिक साक्ष्यों का महत्व है?
संगम साहित्य जैसे सिलप्पादिकारम और मणिमेकलई इस क्षेत्र के व्यापारिक इतिहास के प्रमुख आधार हैं।