1976 में पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने ब्रिटेन से ऐतिहासिक कोहिनूर हीरे की वापसी की मांग की थी। यह मांग ब्रिटिश साम्राज्य के अवशेषों को छोड़ने के प्रतीक के रूप में पेश की गई थी।
- जुल्फिकार अली भुट्टो ने ब्रिटिश पीएम जेम्स कैलेघन को पत्र लिखकर कोहिनूर की वापसी मांगी।
- कोहिनूर को 'प्रकाश का पर्वत' (Mountain of Light) भी कहा जाता है।
- पाकिस्तान ने इसे औपनिवेशिक बोझ से मुक्ति के प्रतीक के रूप में वापस मांगा था।
इतिहास के पन्नों को पलटें तो 7 सितंबर, 1976 का वह दिन याद आता है जब पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने दुनिया के सबसे चर्चित और विवादित रत्न, कोहिनूर हीरे की वापसी के लिए ब्रिटेन सरकार से औपचारिक मांग की थी। यह मांग एक व्यक्तिगत पत्र के माध्यम से तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री जेम्स कैलेघन को भेजी गई थी।
कोहिनूर, जिसे 'प्रकाश का पर्वत' (Mountain of Light) के रूप में भी जाना जाता है, वर्तमान में लंदन के टावर ऑफ लंदन में सुरक्षित है। यह 100 कैरेट का विशाल रत्न महारानी की ताज का मुख्य हिस्सा है और 1849 में पंजाब के ब्रिटिश विलय के बाद से ब्रिटिश राजघराने के पास है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
कोहिनूर का इतिहास सदियों पुराना और रक्तपात से भरा रहा है। यह हीरा लगभग 1,000 साल पुराना माना जाता है। इतिहास के अनुसार, यह हीरा भारत के विभिन्न साम्राज्यों के बीच सत्ता परिवर्तन का गवाह रहा है। अंतिम बार इसे 1937 में राजा जॉर्ज VI के राज्याभिषेक के दौरान क्वीन मदर द्वारा पहना गया था। ब्रिटिश शासन के दौरान, इसे महारानी विक्टोरिया के ताज का हिस्सा बना दिया गया था।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि कोहिनूर केवल एक रत्न नहीं, बल्कि उपनिवेशवाद और राष्ट्रीय पहचान का एक अत्यंत संवेदनशील मुद्दा है। भुट्टो की मांग ने उस समय अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल पैदा कर दी थी, क्योंकि यह ब्रिटेन द्वारा अपने साम्राज्यवादी अवशेषों (Imperial Encumbrances) को छोड़ने की इच्छाशक्ति की परीक्षा थी।
कोहिनूर की वापसी की मांग केवल एक आर्थिक मांग नहीं, बल्कि औपनिवेशिक इतिहास को सुधारने का एक कूटनीतिक प्रयास था।
उस समय के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने तर्क दिया था कि इस हीरे को वापस करना ब्रिटेन के उस आधुनिक दृष्टिकोण का प्रमाण होगा जो अपने पुराने साम्राज्यवादी बोझ को त्यागने के लिए तैयार है। हालांकि, महारानी के प्रवक्ता ने उस समय इस पर कोई टिप्पणी नहीं की थी, और मामला ब्रिटिश प्रधानमंत्री के स्तर पर चर्चा के लिए छोड़ दिया गया था।
Frequently Asked Questions
1. पाकिस्तान ने कोहिनूर की मांग क्यों की थी?
पाकिस्तान का तर्क था कि कोहिनूर की वापसी ब्रिटिश साम्राज्य के अवशेषों को छोड़ने की भावना का प्रदर्शन होगी।
2. कोहिनूर वर्तमान में कहाँ है?
कोहिनूर वर्तमान में लंदन के टावर ऑफ लंदन में ब्रिटिश राजघराने के खजाने के रूप में रखा गया है।