भारतीय वायुसेना के पूर्व वाइस चीफ एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी ने चेतावनी दी है कि भविष्य के युद्धों में अंतरिक्ष-आधारित प्रणालियाँ केवल सहायक नहीं, बल्कि मुख्य भूमिका में होंगी। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे सैटेलाइट और AI युद्ध के मैदान को बदल रहे हैं।

  • अंतरिक्ष अब युद्ध में केवल एक सहायक तत्व नहीं, बल्कि मुख्य खिलाड़ी बन गया है।
  • रूस-यूक्रेन संघर्ष ने साबित किया है कि स्टारलिंक जैसे सैटेलाइट नेटवर्क निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
  • AI और लघुकरण (Miniaturization) के कारण ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों का एक 'मेश' नेटवर्क तैयार हो रहा है।

आज तक सुरक्षा सभा में भारतीय वायुसेना के 49वें पूर्व वाइस चीफ एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी (रिटायर्ड) ने भविष्य के युद्धों की प्रकृति पर एक गंभीर विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में युद्ध केवल जमीन, जल या नभ से नहीं, बल्कि अंतरिक्ष (Space) से निर्देशित और नियंत्रित किए जाएंगे।

एयर मार्शल तिवारी ने रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे सैटेलाइट संचार ने युद्ध की दिशा बदल दी है। उन्होंने स्टारलिंक (Starlink) का जिक्र करते हुए कहा कि यदि यूक्रेन आज भी लड़ पा रहा है, तो इसका मुख्य कारण अंतरिक्ष-आधारित कनेक्टिविटी है, क्योंकि उनके जमीनी संचार बुनियादी ढांचे को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया था।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट्स की दौड़ अब एक नई 'अंतरिक्ष शस्त्र स्पर्धा' में बदल चुकी है। जब कनेक्टिविटी ही सबसे बड़ा हथियार बन जाती है, तो सैटेलाइट्स की सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का सबसे संवेदनशील हिस्सा बन जाती है। यदि कोई दुश्मन देश अंतरिक्ष संपत्तियों को बाधित कर देता है, तो पूरी सेना 'अंधी' और 'बहरी' हो सकती है।

उन्होंने यह भी बताया कि कैसे रूस ने हाल के वर्षों में तस्करी के जरिए सैटेलाइट टर्मिनलों का उपयोग किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अब गैर-राज्य अभिनेता (non-state actors) भी इस तकनीक का दुरुपयोग कर सकते हैं। इसी कारण अब 'व्हाइटलिस्टिंग' और सख्त प्रतिबंधों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

"अगले युद्ध में स्पेस सेगमेंट एक समर्थक नहीं होगा। यह युद्ध का मुख्य खिलाड़ी होगा।"

तिवारी ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंप्यूटिंग पावर और उपकरणों के छोटे आकार (Miniaturization) ने सैन्य नवाचार की गति को बढ़ा दिया है। पहले जिन सैटेलाइट्स के लिए विशाल डिश एंटीना की जरूरत होती थी, अब वे लैपटॉप के आकार के टर्मिनलों में सिमट गए हैं जो इलेक्ट्रॉनिक रूप से सिग्नल स्कैन कर सकते हैं।

यह तकनीक 'स्वायत्त सैन्य प्रणालियों' (Autonomous Systems) के एक जाल या 'मेश' का निर्माण कर रही है। उदाहरण के लिए, समुद्र में सैकड़ों किलोमीटर दूर तैरता एक बिना चालक वाला जहाज (Unmanned Boat) सीधे सैटेलाइट से बात कर सकता है, और वहीं एक ड्रोन लक्ष्य की पहचान कर उस जहाज को निर्देश दे सकता है।

क्या आप जानते हैं?: लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट्स पृथ्वी से बहुत कम ऊंचाई (2,000 किमी से कम) पर होते हैं, जिससे सिग्नल की देरी (Latency) बहुत कम हो जाती है और रीयल-टाइम सैन्य संचालन संभव होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: रूस-यूक्रेन युद्ध में स्टारलिंक ने क्या भूमिका निभाई?
उत्तर 1: इसने यूक्रेन को एक ऐसा संचार नेटवर्क दिया जिसे जमीन पर नष्ट नहीं किया जा सकता था, जिससे वे अपनी सेनाओं का समन्वय करने में सक्षम रहे।

प्रश्न 2: 'कॉम्बैट मेश' (Combat Mesh) क्या है?
उत्तर 2: यह एक ऐसा नेटवर्क है जहाँ सैटेलाइट, ड्रोन और स्वायत्त वाहन बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के सीधे एक-दूसरे से संवाद कर मिशन पूरा करते हैं।