जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाल लिया है, हालांकि पंजाब सरकार ने उनकी नियुक्ति का कड़ा विरोध किया था।

  • जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने 7 सितंबर, 2026 को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।
  • पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नियुक्ति का विरोध करते हुए शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार किया।
  • सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद केंद्र सरकार ने इस नियुक्ति की अधिसूचना जारी की थी।

चंडीगढ़ के लोक भवन में सोमवार को एक औपचारिक समारोह के दौरान जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। गौरतलब है कि जस्टिस मिश्रा जून से इस उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।

इस अवसर पर हरियाणा के राज्यपाल असीम कुमार घोष, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इसके अलावा अकाली विधायक गनीव कौर मजीठिया और पंजाब के मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा भी मौजूद रहे। हालांकि, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की अनुपस्थिति ने इस कार्यक्रम में राजनीतिक तनाव को स्पष्ट कर दिया।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह नियुक्ति केवल एक न्यायिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि पंजाब राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच बढ़ते टकराव का प्रतीक है। शपथ ग्रहण से ठीक एक दिन पहले पंजाब कैबिनेट द्वारा पारित प्रस्ताव यह दर्शाता है कि राज्य सरकार न्यायिक नियुक्तियों में अपनी भूमिका और चिंताओं को लेकर गंभीर है।

किसी मुख्यमंत्री द्वारा मुख्य न्यायाधीश के शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार करना कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच बढ़ते तनाव का एक दुर्लभ संकेत है।

केंद्र सरकार ने 5 सितंबर, 2026 को जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति की अधिसूचना जारी की थी, जो सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के लगभग एक महीने बाद आई। पंजाब सरकार ने 6 सितंबर की शाम को एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र से अनुरोध किया था कि जब तक उनकी चिंताओं का समाधान नहीं हो जाता, तब तक शपथ ग्रहण की प्रक्रिया आगे न बढ़ाई जाए, लेकिन इस मांग को नजरअंदाज कर दिया गया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय भारत के उन चुनिंदा न्यायालयों में से एक है जिसका अधिकार क्षेत्र दो राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश (चंडीगढ़) पर है। अतीत में भी, कॉलेजियम प्रणाली द्वारा न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर राज्य सरकारों और केंद्र के बीच मतभेद देखे गए हैं, जिससे न्यायिक स्वतंत्रता और राज्य की सहमति के बीच एक बहस छिड़ गई है।

क्या आप जानते हैं?: पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय भारत के उन दुर्लभ उच्च न्यायालयों में से एक है जो एक साथ दो राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के न्यायिक मामलों को संभालता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: मुख्यमंत्री भगवंत मान समारोह में क्यों नहीं शामिल हुए?
पंजाब सरकार ने जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति का विरोध किया था और केंद्र से उनकी चिंताओं को दूर करने की मांग की थी।

p>प्रश्न 2: जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति की सिफारिश किसने की थी?
उनकी नियुक्ति की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा की गई थी और केंद्र सरकार ने इसे अधिसूचित किया था।