मंगलुरु रेलवे क्षेत्र के प्रशासनिक नियंत्रण को पलक्कड़ से मैसूरु डिवीजन में स्थानांतरित करने के लिए दोनों डिवीजनों के प्रमुख इस सप्ताह बैठक करेंगे। इस चर्चा में संपत्तियों के हस्तांतरण और परिचालन जिम्मेदारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
- मंगलुरु रेलवे क्षेत्र का प्रशासन 1 अक्टूबर से पलक्कड़ डिवीजन (SR) से मैसूरु डिवीजन (SWR) को हस्तांतरित होगा।
- इस सप्ताह दोनों डिवीजनों के डीआरएम (DRM) मंगलुरु में मिलकर परिसंपत्तियों और परिचालन modalities को अंतिम रूप देंगे।
- लगभग 2,000 रेल कर्मचारियों के भविष्य और परिचालन निरंतरता पर विशेष चर्चा होगी।
दक्षिण पश्चिम रेलवे (SWR) के मैसूरु डिवीजन और दक्षिण रेलवे (SR) के पलक्कड़ डिवीजन के मंडल रेल प्रबंधकों (DRMs) और वरिष्ठ अधिकारियों की इस सप्ताह मंगलुरु में एक उच्च स्तरीय बैठक होने वाली है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य मंगलुरु रेलवे क्षेत्र के प्रशासनिक नियंत्रण के सुचारू हस्तांतरण की रूपरेखा तैयार करना है।
रेल मंत्रालय ने 21 अगस्त को यह निर्णय लिया था कि प्रशासनिक कारणों से और कोचिंग एवं मालगाड़ियों के निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करने के लिए मंगलुरु क्षेत्र को मैसूरु डिवीजन के साथ एकीकृत किया जाएगा। यह बदलाव आधिकारिक तौर पर 1 अक्टूबर से प्रभावी होगा। नए आदेश के अनुसार, SWR का अधिकार क्षेत्र दक्षिण में उल्लाल रेलवे स्टेशन तक और उत्तर में ठोकुर (कोंकण रेलवे सीमा) तक विस्तारित होगा।
परिसंपत्तियों का हस्तांतरण और बुनियादी ढांचा
हस्तांतरण प्रक्रिया के तहत, मैसूरु डिवीजन मंगलुरु सेंट्रल और मंगलुरु जंक्शन की महत्वपूर्ण संपत्तियों का प्रभार संभालेगा। मंगलुरु सेंट्रल में 6 प्लेटफॉर्म, 3 पिट लाइन्स और एक प्रमुख कोचिंग डिपो है, जहाँ लगभग 17 जोड़ी ट्रेनों (450 कोच) का प्राथमिक रखरखाव होता है। वहीं, मंगलुरु जंक्शन एक प्रमुख माल डिपो और डीजल ईंधन स्टेशन के रूप में कार्य करता है।
| सुविधा | मंगलुरु सेंट्रल (Central) | मंगलुरु जंक्शन (Junction) |
|---|---|---|
| प्लेटफॉर्म | 6 (एक बे प्लेटफॉर्म सहित) | 3 |
| मुख्य कार्य | कोचिंग डिपो और रखरखाव | माल डिपो और ईंधन स्टेशन |
| रनिंग रूम | 63 बेड (महिला स्टाफ हेतु विशेष) | 64 बेड (महिला स्टाफ हेतु विशेष) |
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह बदलाव केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि रणनीतिक है। मंगलुरु क्षेत्र लंबे समय से पलक्कड़ डिवीजन का एक महत्वपूर्ण परिचालन केंद्र रहा है। अब इसे मैसूरु डिवीजन के तहत लाने से कर्नाटक के भीतर बेहतर समन्वय और बुनियादी ढांचे के विकास की संभावना बढ़ेगी, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में सुधार होगा।
"यह संक्रमण रेल परिचालन की दक्षता बढ़ाने और क्षेत्रीय प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।"
कर्मचारियों के संबंध में, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि लगभग 2,000 रेलकर्मियों के स्थानांतरण या अवशोषण की प्रक्रिया रेल मंत्रालय के निर्धारित नियमों के अनुसार होगी। फिलहाल किसी बड़े पैमाने पर स्थानांतरण की योजना नहीं है, जिससे कर्मचारियों में व्याप्त चिंता को दूर करने का प्रयास किया गया है।
Frequently Asked Questions
1. यह प्रशासनिक परिवर्तन कब से लागू होगा?
यह परिवर्तन 1 अक्टूबर से प्रभावी होगा, जिसके बाद मंगलुरु क्षेत्र मैसूरु डिवीजन के अधीन होगा।
2. क्या इस बदलाव से रेल कर्मचारियों का तबादला होगा?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कोई तत्काल बड़े पैमाने पर स्थानांतरण नहीं होगा और प्रक्रिया मंत्रालय के नियमों के अनुसार होगी।