बढ़ते समुद्र के स्तर के कारण मुंबई के डूबने का खतरा बढ़ गया है, जिसे देखते हुए बीएमसी ने शहर की 149 किमी लंबी तटरेखा पर नया जोखिम मूल्यांकन शुरू किया है। यह अध्ययन तटीय विकास और भूमि उपयोग में बदलावों के प्रभाव का विश्लेषण करेगा।

  • बीएमसी मुंबई की 149 किमी लंबी तटरेखा के लिए नया जलवायु-जोखिम मूल्यांकन कर रहा है।
  • संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2100 तक समुद्र का स्तर 0.5 मीटर से 2 मीटर तक बढ़ सकता है।
  • तटीय सड़क और सॉल्ट पैन भूमि के विकास ने शहर की संवेदनशीलता को बदल दिया है।
  • मैंग्रोव का संरक्षण मुंबई को बाढ़ से बचाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मुंबई के सामने इस सदी के अंत तक समुद्र में समा जाने का गंभीर संकट मंडरा रहा है। इस खतरे को देखते हुए, बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने शहर की समुद्र के बढ़ते स्तर के प्रति संवेदनशीलता का आकलन करने के लिए एक नया अध्ययन शुरू किया है। यह पिछले पांच वर्षों में किया जाने वाला दूसरा ऐसा प्रयास है।

यह नया जलवायु-जोखिम मूल्यांकन मुंबई की 149 किलोमीटर लंबी तटरेखा के साथ संवेदनशील क्षेत्रों का मानचित्रण करेगा। इसमें उन आबादी वाले क्षेत्रों की पहचान की जाएगी जो खतरे में हैं और यह भी देखा जाएगा कि भूमि उपयोग, तटीय विकास और जलवायु पैटर्न में बदलावों ने शहर की स्थिति को कैसे प्रभावित किया है। इस रिपोर्ट के अगले साल जारी होने की उम्मीद है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह अध्ययन?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मुंबई का भूगोल और हालिया बुनियादी ढांचा विकास इसे अत्यधिक जोखिम में डाल रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक हालिया रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि 2024 में वैश्विक समुद्र स्तर में रिकॉर्ड 5.9 मिमी की वृद्धि हुई है। यदि अंटार्कटिक बर्फ की चादर अस्थिर होती है, तो समुद्र का स्तर 2 मीटर तक बढ़ सकता है, जो मुंबई जैसे तटीय शहरों के लिए विनाशकारी होगा।

मुंबई में बाढ़ केवल जलवायु परिवर्तन की समस्या नहीं है, बल्कि यह अनियोजित विकास और प्रबंधन की विफलता का परिणाम है।

पिछले पांच वर्षों में मुंबई के तट में भारी बदलाव आए हैं। पश्चिमी तट पर कोस्टल रोड के निर्माण के लिए अरब सागर के 100 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को पुन: प्राप्त (reclaim) किया गया है। वहीं पूर्वी हिस्से में सॉल्ट पैन भूमि का विकास किया जा रहा है। इन परिवर्तनों ने शहर की प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था को प्रभावित किया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति

2022 में जारी पहले मुंबई जलवायु कार्य योजना (MCAP) ने चेतावनी दी थी कि 2050 तक मुंबई के द्वीप शहर का 80 प्रतिशत हिस्सा जलमग्न हो सकता है। वैज्ञानिकों ने अरब सागर के बढ़ते तापमान (SST) को इस खतरे का मुख्य कारण माना है।

कारकप्रभाव
समुद्र स्तर में वृद्धितटीय क्षेत्रों का जलमग्न होना
मैंग्रोव की कमीप्राकृतिक सुरक्षा कवच का खत्म होना
अनियोजित विकासबाढ़ का खतरा और जल निकासी में बाधा

विशेषज्ञों का कहना है कि मैंग्रोव और तटीय आर्द्रभूमि (wetlands) मुंबई के फेफड़ों की तरह काम करते हैं। इनका संरक्षण न केवल जैव विविधता के लिए बल्कि शहर को समुद्री तूफानों और बाढ़ से बचाने के लिए भी अनिवार्य है।

Did You Know?: मुंबई के कोस्टल रोड प्रोजेक्ट के लिए अरब सागर के 100 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को भूमि में बदल दिया गया है।

Frequently Asked Questions

1. बीएमसी का नया अध्ययन क्या जांचेगा?
यह अध्ययन मुंबई की तटरेखा के संवेदनशील हिस्सों, आबादी वाले जोखिम वाले क्षेत्रों और भूमि उपयोग में बदलाव के प्रभाव की जांच करेगा।

2. समुद्र का स्तर बढ़ने का मुख्य कारण क्या है?
ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्र की सतह के तापमान (SST) में वृद्धि और ग्लेशियरों का पिघलना मुख्य कारण हैं।