मैसूर दशहरा फूड मेला वेंडर्स एसोसिएशन ने स्टॉल आवंटन के लिए प्रस्तावित लॉटरी प्रणाली का कड़ा विरोध किया है। वेंडरों ने पुराने अनुभवी विक्रेताओं को प्राथमिकता देने और स्टाल की कीमतों को नियंत्रित करने की मांग की है।
- वेंडर्स एसोसिएशन ने स्टॉल आवंटन के लिए लॉटरी सिस्टम को खारिज करने की मांग की है।
- अनुभवी वेंडरों, जो पिछले 15 वर्षों से भाग ले रहे हैं, को प्राथमिकता देने का आग्रह किया गया है।
- स्टॉल की कीमतों में भारी वृद्धि और पार्किंग सुविधाओं की कमी पर चिंता जताई गई है।
मैसूर, कर्नाटक: मैसूर दशहरा फूड मेला वेंडर्स एसोसिएशन ने स्टॉल आवंटन के लिए अधिकारियों द्वारा प्रस्तावित लॉटरी प्रणाली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को मैसूर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, एसोसिएशन के अध्यक्ष नागराजू एस. ने दशहरा फूड मेला उप-समिति से इस प्रणाली को तुरंत छोड़ने का आग्रह किया।
एसोसिएशन का तर्क है कि लॉटरी प्रणाली निष्पक्ष नहीं है। वेंडरों ने आरोप लगाया है कि कई आवेदक अपने रिश्तेदारों के नाम पर कई आवेदन जमा कर रहे हैं ताकि चयन की संभावनाओं को बढ़ाया जा सके। इससे वे ईमानदार वेंडर पिछड़ रहे हैं जिन्होंने केवल एक आवेदन दिया है।
क्यों यह महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह के विवाद उत्सव के आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। यदि वेंडरों और प्रशासन के बीच तालमेल नहीं बैठता है, तो इसका सीधा असर मेले की गुणवत्ता और आगंतुकों के अनुभव पर पड़ेगा।
एसोसिएशन की उपाध्यक्ष शांता एम. ने बताया कि पिछले साल लगभग 160 स्टॉल आवंटित किए गए थे, जिनमें 50 से 60 मांसाहारी स्टॉल शामिल थे। इस वर्ष आवेदनों की संख्या 500 को पार कर गई है, जिससे प्रतिस्पर्धा और भी अधिक जटिल हो गई है।
लॉटरी प्रणाली के बजाय अनुभव और गुणवत्ता के आधार पर चयन करना उत्सव की परंपरा को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
आर्थिक बोझ के संबंध में, वेंडरों ने स्टॉल शुल्क में हुई वृद्धि पर भी आपत्ति जताई है। पिछले वर्ष शाकाहारी स्टॉल ₹60,000 और मांसाहारी स्टॉल ₹80,000 में थे, जो इस वर्ष बढ़कर क्रमशः ₹75,000 और ₹1 लाख हो गए हैं। वेंडरों का कहना है कि यदि शुल्क कम रहता है, तो वे आगंतुकों को किफायती दरों पर बेहतर भोजन प्रदान कर सकेंगे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मैसूर दशहरा न केवल एक धार्मिक उत्सव है, बल्कि यह कर्नाटक की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है। दशकों से, दशहरा फूड मेला इस उत्सव का एक अभिन्न अंग रहा है, जहाँ स्थानीय स्वाद और परंपराओं का संगम होता है।
| स्टॉल प्रकार | पिछले वर्ष की लागत (₹) | इस वर्ष की लागत (₹) |
|---|---|---|
| शाकाहारी स्टॉल | 60,000 | 75,000 |
| मांसाहारी स्टॉल | 80,000 | 1,00,000 |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: वेंडर्स की मुख्य मांग क्या है?
उत्तर: वेंडर्स चाहते हैं कि लॉटरी के बजाय पिछले 15 वर्षों से काम कर रहे अनुभवी वेंडरों को प्राथमिकता दी जाए।
प्रश्न 2: स्टॉल की कीमतों में कितनी वृद्धि हुई है?
उत्तर: शाकाहारी स्टॉल में ₹15,000 और मांसाहारी स्टॉल में ₹20,000 की वृद्धि हुई है।