रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र ने 'सुरक्षा सभा' में ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का श्रेय भारत की स्वदेशी तकनीक और दीर्घकालिक रणनीतिक तैयारी को दिया है। उन्होंने बताया कि कैसे IACCS और ब्रह्मोस जैसे प्रणालियों ने दुश्मन को करारा जवाब दिया।

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  • ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का मुख्य आधार स्वदेशी हथियार और प्रणालियाँ थीं।
  • IACCS (इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम) को विकसित करने में 15 साल का समय लगा।
  • भविष्य के युद्ध पूरी तरह से तकनीक, AI और डेटा नेटवर्क पर आधारित होंगे।
  • ब्रह्मोस मिसाइल की 2-मीटर की सटीकता भारतीय इंजीनियरिंग का चमत्कार है।

आजतक की 'सुरक्षा सभा' के 'आसमान के रखवाले' सत्र में वेस्टर्न एयर कमांड के पूर्व एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्र ने भारतीय वायुसेना की गुप्त रणनीतियों और ऑपरेशन सिंदूर के पीछे के विज्ञान पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि युद्ध केवल सीमा पर नहीं, बल्कि वर्षों की तैयारी और दूरदर्शिता के परिणामस्वरूप जीता जाता है।

स्वदेशीकरण: संप्रभुता का नया अध्याय

एयर मार्शल मिश्र ने जोर देकर कहा कि विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम भरी होती है क्योंकि इसमें डेटा साझा करना पड़ता है। इसी जोखिम को खत्म करने के लिए भारतीय वैज्ञानिकों और वायुसेना अधिकारियों ने मिलकर IACCS (Integrated Air Command and Control System) का निर्माण किया। इस प्रणाली को विकसित करने में लगभग 15 वर्ष लगे, जिसने देश के सभी सैन्य और नागरिक रडारों को एक नेटवर्क में जोड़ दिया है।

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, IACCS का कार्यान्वयन भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को दर्शाता है। अब भारत किसी तीसरे देश के सर्वर या डेटा फॉर्मेट पर निर्भर नहीं है, जिससे कमांड और कंट्रोल सेंटर से सीधे मिसाइल दागने का आदेश दिया जा सकता है। यह 'डिजिटल डिफेंस' की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

"भविष्य का युद्ध आज ही चल रहा है; जो लोग सोच रहे हैं कि कुछ नहीं हो रहा, वे वास्तव में तकनीक की धीमी लेकिन गहरी प्रगति को नजरअंदाज कर रहे हैं।"

तकनीकी सटीकता और ब्रह्मोस का प्रभाव

उन्होंने ब्रह्मोस एयर लॉन्च क्रूज मिसाइल का उदाहरण देते हुए बताया कि सुखोई-30 से दागी गई यह मिसाइल 250-300 किलोमीटर दूर लक्ष्य को मात्र दो मीटर की सटीकता के साथ भेद सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के युग में यदि भारत ने अपनी रफ्तार नहीं बढ़ाई, तो वैश्विक सैन्य प्रतिस्पर्धा में पिछड़ने का खतरा हो सकता है।

बालाकोट बनाम ऑपरेशन सिंदूर

रणनीतिक तुलना करते हुए उन्होंने बताया कि बालाकोट और सिंदूर दोनों में क्षमताएं समान थीं, लेकिन रणनीति अलग थी। उन्होंने बहावलपुर और मुरीद के हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि सैटेलाइट इमेजरी और जमीनी तस्वीरों ने भारतीय वायुसेना के हमलों की विनाशकारी सटीकता को साबित किया है।

विशेषता बालाकोट हमला ऑपरेशन सिंदूर
रणनीति प्रारंभिक चेतावनी और प्रहार विस्तारित प्रतिक्रिया और विनाश
प्रमाण सीमित जमीनी तस्वीरें सटीक सैटेलाइट और ग्राउंड इमेज
तकनीक विदेशी-स्वदेशी मिश्रण भारी स्वदेशी प्रणालियों का उपयोग
क्या आप जानते हैं?: IACCS प्रणाली के तहत अब दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे नागरिक हवाई अड्डों के शक्तिशाली रडार भी देश की सैन्य सुरक्षा निगरानी का हिस्सा हैं।

प्रश्न 1: IACCS क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: यह एक एकीकृत वायु कमान और नियंत्रण प्रणाली है जो सभी रडारों को एक नेटवर्क से जोड़ती है, जिससे डेटा साझा करना आसान और सुरक्षित होता है।

प्रश्न 2: ऑपरेशन सिंदूर में स्वदेशी हथियारों की क्या भूमिका थी?
उत्तर: स्वदेशी हथियारों ने भारत को विदेशी निर्भरता से मुक्त किया और दुश्मन के खिलाफ अधिक सटीक और गोपनीय प्रहार करने में मदद की।