सत्य निकेतन में एक पीजी इमारत गिरने से सात छात्रों की मौत के बाद भी, इलाके में असुरक्षित और अवैध कमरे किराए पर दिए जा रहे हैं। यह जांच दिल्ली में छात्रों के लिए सुरक्षित आवास की कमी और प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है।

  • सत्य निकेतन में पीजी इमारत गिरने से सात छात्रों की जान गई।
  • जांच में पाया गया कि छोटे प्लॉटों पर बनी पांच मंजिला अवैध इमारतें अब भी कमरे किराए पर दे रही हैं।
  • छात्र हॉस्टलों की भारी कमी युवाओं को इन 'डेथ ट्रैप' पीजी में रहने को मजबूर करती है।
  • दिल्ली हाईकोर्ट ने MCD से निर्माण कार्यों की निगरानी में विफलता पर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी इमारत गिरने से सात छात्रों की मौत की घटना ने राजधानी में छात्रों के लिए उपलब्ध किराए के आवासों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार और नागरिक अधिकारियों ने इमारतों के स्ट्रक्चरल ऑडिट का वादा किया है, लेकिन एक जमीनी जांच से पता चला है कि हादसे वाली जगह के पास ही अब भी असुरक्षित कमरे छात्रों को दिए जा रहे हैं।

जांच के दौरान पाया गया कि हादसे वाली जगह से महज 100 मीटर की दूरी पर साई प्रॉपर्टीज के एक ब्रोकर ने टीम को पांच मंजिला पीजी इमारत दिखाई। यहाँ 8x10 फीट के कमरे 9,000 से 20,000 रुपये के बीच दिए जा रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इमारत की दीवारों पर सीलन साफ दिख रही थी और पाइपलाइनों से पानी रिस रहा था। सीढ़ियों पर रोशनी की भारी कमी थी, जो किसी भी आपात स्थिति में जानलेवा साबित हो सकती है।

मोती बाग गांव की तंग गलियों में स्थिति और भी भयावह है। यहाँ कई पुराने मकानों पर बिना किसी तकनीकी अनुमति के अतिरिक्त मंजिलें बना दी गई हैं। गलियां इतनी संकरी हैं कि आग लगने या मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में दमकल की गाड़ियाँ या एम्बुलेंस का अंदर पहुँचना लगभग असंभव है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, मूल नींव इन अतिरिक्त मंजिलों का भार सहने के लिए नहीं बनाई गई थी।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल कुछ लालची मकान मालिकों का मामला नहीं है, बल्कि नगर निगम (MCD) की एक बड़ी विफलता है। जब एक ही इलाके के 299 मकानों में से 200 से अधिक व्यावसायिक पीजी के रूप में चल रहे हों, तो यह स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार या लापरवाही ने सुरक्षा नियमों को दरकिनार कर दिया है। छात्र अपनी पढ़ाई के लिए दिल्ली आते हैं और हॉस्टलों की कमी के कारण वे इन असुरक्षित कमरों के जाल में फंस जाते हैं।

दिल्ली में छात्र आवास का विनियमन न होना एक टिकते हुए टाइम बम की तरह है, जहाँ मानव जीवन से ऊपर मुनाफे को रखा गया है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए MCD को निर्देश दिया है कि वह जांच करे कि क्या गिरी हुई इमारत का निर्माण वैध अनुमति के साथ किया गया था। कोर्ट ने अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और सभी पीजी हॉस्टलों का ऑडिट करने को कहा है। साथ ही, सरकार और दिल्ली विश्वविद्यालय को अधिक हॉस्टल बनाने का निर्देश दिया गया है ताकि निजी ऑपरेटरों का शोषण कम हो सके।

विशेषता नियमित हॉस्टल अवैध पीजी (सत्य निकेतन)
स्ट्रक्चरल ऑडिट अनिवार्य और समय-समय पर शायद ही कभी होता है
आपातकालीन पहुंच मानकीकृत पहुंच मार्ग अत्यधिक संकरी गलियां
मंजिलों की संख्या नियमों के अनुसार अवैध अतिरिक्त मंजिलें
क्या आप जानते हैं?: दिल्ली के कुछ इलाकों में रिहायशी मकानों को पीजी बनाने के लिए बिना नींव मजबूत किए 2-3 अतिरिक्त मंजिलें खड़ी कर दी जाती हैं, जो किसी भी समय गिर सकती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: छात्र इन असुरक्षित पीजी में क्यों रह रहे हैं?
विश्वविद्यालय हॉस्टलों की भारी कमी और कॉलेज के करीब रहने की मजबूरी के कारण छात्र सुरक्षा के बजाय बजट और लोकेशन को प्राथमिकता देते हैं।

प्रश्न 2: दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या निर्देश दिए हैं?
कोर्ट ने MCD को उच्च स्तरीय जांच करने, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने और इलाके के सभी पीजी का सुरक्षा ऑडिट करने का आदेश दिया है।