तमिलनाडु सरकार ने राज्य के 28 जिलों में ग्राम पंचायतों और जिला पंचायतों के विशेष अधिकारियों के कार्यकाल को बढ़ाने के लिए विधानसभा में एक विधेयक पेश किया है। परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया पूरी न होने के कारण चुनाव में देरी हुई है।

  • तमिलनाडु सरकार ने पंचायत अधिनियम 1994 में संशोधन के लिए विधेयक पेश किया।
  • 28 जिलों के ग्राम पंचायतों, पंचायत संघ परिषदों और जिला पंचायतों के विशेष अधिकारियों का कार्यकाल बढ़ाया जाएगा।
  • परिसीमन और वार्ड आरक्षण की अधूरी प्रक्रिया चुनावों में मुख्य बाधा बनी हुई है।

चेन्नई: तमिलनाडु सरकार ने सोमवार को राज्य विधानसभा में एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश किया, जिसका उद्देश्य तमिलनाडु पंचायत अधिनियम 1994 में संशोधन करना है। इस संशोधन के माध्यम से राज्य के 28 जिलों में ग्राम पंचायतों, पंचायत संघ परिषदों और जिला पंचायतों के लिए नियुक्त विशेष अधिकारियों (Special Officers) के कार्यकाल को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है।

सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, इन स्थानीय निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल 5 जनवरी, 2025 को समाप्त हो चुका था। हालांकि, लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत नए चुनाव आयोजित किए जाने थे, लेकिन प्रशासनिक जटिलताओं के कारण इसमें विलंब हुआ है। विशेष रूप से, कांचीपुरम, चेंगलपट्टु, विल्लुपुरम, कल्लकुरिची, वेल्लोर, रानीपेट, तिरुपत्तूर, तिरुनेलवेली और तेनकासी जिलों को इस विस्तार प्रक्रिया से बाहर रखा गया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि स्थानीय निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधियों के बजाय विशेष अधिकारियों का लंबे समय तक बने रहना जमीनी स्तर के लोकतंत्र (Grassroots Democracy) के लिए एक चुनौती हो सकता है। जब तक परिसीमन (Delimitation) और वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक प्रशासनिक शून्यता को भरने के लिए यह कदम आवश्यक है, लेकिन यह निर्वाचित जवाबदेही को सीमित करता है।

"स्थानीय शासन में निर्वाचित प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति से ग्रामीण विकास योजनाओं के कार्यान्वयन में जन-भागीदारी कम हो सकती है।"

विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि ग्रामीण स्थानीय निकायों के चुनाव इसलिए नहीं कराए जा सके क्योंकि वार्डों के परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया अभी भी लंबित है। इससे पहले, विशेष अधिकारियों के कार्यकाल को समय-समय पर बढ़ाया गया था, जिसमें अंतिम विस्तार 5 जुलाई, 2026 को किया गया था।

इसके बाद, सरकार ने 6 जुलाई से 19 अक्टूबर तक के लिए उनके कार्यकाल को बढ़ाने का आदेश जारी किया था। अब पेश किया गया यह विधेयक उस प्रशासनिक निर्णय को कानूनी मान्यता देने का प्रयास है ताकि शासन व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे।

क्या आप जानते हैं?: भारत में 73वें संविधान संशोधन अधिनियम ने पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया था, जिससे ग्रामीण स्तर पर स्वशासन सुनिश्चित हुआ।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: किन जिलों को इस कार्यकाल विस्तार से बाहर रखा गया है?
उत्तर: कांचीपुरम, चेंगलपट्टु, विल्लुपुरम, कल्लकुरिची, वेल्लोर, रानीपेट, तिरुपत्तूर, तिरुनेलवेली और तेनकासी जिलों को इसमें शामिल नहीं किया गया है।

प्रश्न 2: चुनाव आयोजित न हो पाने का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: वार्डों के परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया का पूरा न होना चुनाव में देरी का मुख्य कारण है।