आम आदमी पार्टी के विधायक मेहराज मलिक ने अपनी सुरक्षा और एस्कॉर्ट वाहन की बहाली के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। मलिक का दावा है कि PSA हटने के बावजूद उन्हें सुरक्षा नहीं दी गई, जिससे उनकी जान को खतरा है।

  • विधायक मेहराज मलिक ने सुरक्षा कवर की बहाली के लिए जेएंडके हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
  • PSA के तहत जेल जाने के बाद उनकी सुरक्षा हटा ली गई थी, जिसे अदालत ने बाद में रद्द कर दिया था।
  • अदालत ने सुरक्षा समीक्षा समन्वय समिति (SRCC) को 6 सप्ताह के भीतर खतरे का आकलन करने का निर्देश दिया है।

आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक मेहराज मलिक ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को बहाल करने की मांग को लेकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय का रुख किया है। यह कानूनी कदम उस समय उठाया गया जब प्रशासन ने उनकी सुरक्षा और एस्कॉर्ट वाहन को वापस ले लिया था। गौरतलब है कि मलिक को सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (PSA) के तहत गिरफ्तार किया गया था और वे लगभग आठ महीने तक जेल में रहे थे।

मलिक को इस वर्ष अप्रैल में जेल से रिहा किया गया था, जब अदालत ने उनके खिलाफ लगाए गए PSA को रद्द कर दिया था। हालांकि, रिहाई के बाद भी उनकी सुरक्षा व्यवस्था बहाल नहीं की गई, जिसने उन्हें कानूनी रास्ता अपनाने पर मजबूर किया। 7 सितंबर को दायर याचिका में, मलिक ने तर्क दिया कि एक निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में उनकी सुरक्षा अनिवार्य है, विशेष रूप से तब जब उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र के संवेदनशील क्षेत्रों का दौरा करना पड़ता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति की सुरक्षा का नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक जवाबदेही के बीच के संघर्ष का है। जब किसी निर्वाचित सदस्य की सुरक्षा को 'राजनीतिक धारणा' (Political Perception) के आधार पर नियंत्रित किया जाता है, तो यह लोकतांत्रिक कार्यों में बाधा डाल सकता है। यह मामला दर्शाता है कि कैसे कानूनी सुरक्षा उपायों (जैसे PSA) का उपयोग राजनीतिक विरोधियों को सीमित करने के लिए किया जा सकता है, जिसका प्रभाव उनकी रिहाई के बाद भी बना रहता है।

सुरक्षा का अधिकार खतरे के वास्तविक आकलन पर आधारित होना चाहिए, न कि किसी राजनीतिक संबद्धता या प्रशासनिक पूर्वाग्रह पर।

अपनी याचिका में, मलिक ने उल्लेख किया कि अन्य विधायकों को उचित सुरक्षा और वाहन प्रदान किए गए हैं, जबकि उन्हें बार-बार अनुरोध करने के बावजूद नजरअंदाज किया गया। उन्होंने बताया कि 3 अगस्त, 2026 को दिए गए उनके प्रतिनिधित्व का प्रशासन ने कोई जवाब नहीं दिया। मलिक का कहना है कि वे 'आतंक प्रभावित क्षेत्रों' में सार्वजनिक बैठकों और जमीनी स्तर की बातचीत के लिए यात्रा करते हैं, जिससे जोखिम बढ़ जाता है।

उच्च न्यायालय ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए सुरक्षा समीक्षा समन्वय समिति (SRCC) को आदेश दिया है कि वे मलिक के खतरे के स्तर की जांच करें और छह सप्ताह के भीतर निर्णय लें। मलिक ने इस आदेश का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि अब निष्पक्ष और पेशेवर मूल्यांकन किया जाएगा।

क्या आप जानते हैं?: सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (PSA) जम्मू और कश्मीर में प्रशासन को बिना मुकदमे के किसी व्यक्ति को निवारक हिरासत में रखने की अनुमति देता है, जो अक्सर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र रहता है।

Frequently Asked Questions

1. मेहराज मलिक की सुरक्षा क्यों हटाई गई थी?
उनकी सुरक्षा तब हटाई गई थी जब उन्हें सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (PSA) के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

2. अदालत ने इस मामले में क्या निर्देश दिए हैं?
अदालत ने SRCC को निर्देश दिया है कि वे 6 सप्ताह के भीतर विधायक के खतरे के आकलन की समीक्षा करें और निर्णय लें।