बिहार के कई हिस्सों में जलस्तर घटने से राहत मिली है, लेकिन 13 जिलों के 34 लाख से अधिक लोग अब भी बाढ़ की चपेट में हैं। प्रशासन द्वारा राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी हैं।
- 13 जिलों की 480 ग्राम पंचायतों और 79 ब्लॉकों के लगभग 34.31 लाख लोग प्रभावित।
- कोसी और सोन नदियों के जलस्तर में गिरावट, लेकिन गंगा और गंडक अब भी खतरे के निशान से ऊपर।
- 10 लाख से अधिक लोगों के लिए 432 सामुदायिक रसोई संचालित।
- बचाव कार्य के लिए 1,832 नावें और NDRF/SDRF की 37 टीमें तैनात।
बिहार के कई जिलों में बाढ़ के पानी का स्तर घटने या स्थिर होने से लाखों प्रभावित लोगों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, आपदा प्रबंधन विभाग (DMD) के अधिकारियों के अनुसार, कई प्रमुख नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे बाढ़ का खतरा पूरी तरह टला नहीं है।
नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा का प्रभाव अत्यंत व्यापक है। राज्य के 13 जिलों के 79 ब्लॉकों की 480 ग्राम पंचायतों में लगभग 34.31 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त है।
नदियों की स्थिति पर नजर डालें तो, कोसी बैराज पर डिस्चार्ज 1,69,985 क्यूसेक और सोन नदी के इंद्रपुरी बैराज पर 1,04,758 क्यूसेक दर्ज किया गया है, जो गिरावट का संकेत है। हालांकि, सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर 2021 के रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया है। गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, गंगा, पुनपुन और घाघरा नदियां अभी भी कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि बिहार में हर साल आने वाली यह बाढ़ केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि नदी प्रबंधन और तटबंधों की विफलता का परिणाम है। गंगा और गंडक जैसी नदियों का बार-बार खतरे के निशान को पार करना यह दर्शाता है कि वर्तमान बुनियादी ढांचा हिमालयी क्षेत्रों से आने वाले भारी जल प्रवाह को संभालने में सक्षम नहीं है।
बिहार में बाढ़ की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए केवल राहत कार्यों पर निर्भर रहने के बजाय जलवायु-अनुकूल शहरी और ग्रामीण नियोजन की तत्काल आवश्यकता है।
राज्य सरकार ने प्रभावितों के लिए व्यापक राहत अभियान चलाया है। वर्तमान में 432 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं, जहाँ 10 लाख से अधिक लोगों को दिन में दो बार भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा, 14 राहत शिविरों में 12,294 बाढ़ पीड़ितों के लिए आवास, भोजन और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
बचाव कार्य को गति देने के लिए 1,832 नावें तैनात की गई हैं। साथ ही, 27 SDRF और 10 NDRF टीमों को विभिन्न जिलों में तैनात किया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना जिले के बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा किया और उपमुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी को राहत और बचाव कार्यों की निगरानी के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए।
| नदी/बैराज | स्थिति/डिस्चार्ज | रुझान |
|---|---|---|
| कोसी बैराज | 1,69,985 क्यूसेक | घट रहा है |
| इंद्रपुरी (सोन) | 1,04,758 क्यूसेक | घट रहा है |
| गंगा (सुल्तानगंज) | 2021 रिकॉर्ड के करीब | स्थिर/उच्च |
| गंडक (वाल्मीकि) | खतरे के निशान से ऊपर | स्थिर |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: बिहार बाढ़ से कितने लोग प्रभावित हुए हैं?
लगभग 34.31 लाख लोग 13 जिलों में बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
प्रश्न 2: सरकार द्वारा राहत के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
सरकार ने 432 सामुदायिक रसोई, 1,832 नावें और NDRF/SDRF की 37 टीमें तैनात की हैं।