भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने चेन्नई स्मार्ट सिटी मिशन में भारी विचलनों और वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स को बिना किसी ठोस कारण के छोड़ दिया गया और बजट का दुरुपयोग किया गया।

  • ₹1,366.25 करोड़ की योजना में से ₹279.03 करोड़ के 8 प्रोजेक्ट्स लागू नहीं हुए।
  • बिना नागरिक परामर्श के ₹189.66 करोड़ के 20 अनियोजित प्रोजेक्ट्स शुरू किए गए।
  • ₹76.32 करोड़ के 13 प्रोजेक्ट्स निर्धारित क्षेत्र (ABD) के बाहर चलाए गए।
  • प्रशासनिक फंड का ₹16.23 करोड़ का विचलन और वैधानिक मंजूरी का अभाव पाया गया।

भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने चेन्नई में स्मार्ट सिटी मिशन के कार्यान्वयन पर एक विस्तृत प्रदर्शन ऑडिट रिपोर्ट पेश की है। यह रिपोर्ट, जो अप्रैल 2016 से मार्च 2024 तक की अवधि को कवर करती है, 8 सितंबर को तमिलनाडु विधानसभा में पेश की गई। ऑडिट में पाया गया कि चेन्नई स्मार्ट सिटी लिमिटेड (SCL) ने परियोजना नियोजन और फंड प्रबंधन में गंभीर लापरवाही बरती है।

रिपोर्ट के अनुसार, चेन्नई के लिए कुल 48 प्रोजेक्ट्स की योजना बनाई गई थी, जिनकी कुल लागत ₹1,366.25 करोड़ थी। इनमें से 8 महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स, जिनकी कीमत ₹279.03 करोड़ थी, को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया। इनमें ₹248.47 करोड़ की स्ट्रीट लाइट मॉनिटरिंग सिस्टम और ₹100 करोड़ का इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम शामिल था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन प्रोजेक्ट्स को छोड़ने के लिए रिकॉर्ड में कोई विशिष्ट औचित्य नहीं दिया गया था।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल वित्तीय चूक नहीं है, बल्कि शहरी नियोजन की विफलता है। जब उच्च-तकनीकी ट्रैफिक और लाइटिंग सिस्टम जैसे बुनियादी ढांचे को बिना कारण हटाया जाता है, तो स्मार्ट सिटी का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है। यह दर्शाता है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की भारी कमी थी।

एक तरफ जहां जरूरी प्रोजेक्ट्स को छोड़ा गया, वहीं चेन्नई प्रशासन ने ₹189.66 करोड़ की लागत वाले 20 ऐसे प्रोजेक्ट्स शुरू किए जो मूल योजना का हिस्सा नहीं थे। इनमें जल निकायों की बहाली, बायोगैस प्लांट, कन्नाममपेट्टई श्मशान घाट का आधुनिकीकरण और स्मार्ट क्लासरूम जैसे कार्य शामिल थे। CAG ने स्पष्ट किया कि इन अनियोजित कार्यों के लिए नागरिकों से कोई परामर्श नहीं लिया गया था।

"शहरी विकास परियोजनाओं में योजनाबद्ध विचलन और बिना परामर्श के फंड का पुनर्वितरण सार्वजनिक जवाबदेही के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है।"

वित्तीय अनियमितताएं यहीं समाप्त नहीं होतीं। ऑडिट में पाया गया कि ₹76.32 करोड़ के 13 प्रोजेक्ट्स को स्वीकृत एरिया बेस्ड डेवलपमेंट (ABD) ज़ोन के बाहर लागू किया गया। इसके अलावा, चेन्नई स्मार्ट सिटी लिमिटेड (SCL) ने प्रशासनिक खर्चों के लिए रखे गए फंड से ₹16.23 करोड़ का विचलन किया, जिसमें सरकारी विज्ञापनों और पुनर्वास कार्यों पर खर्च शामिल था।

एक और गंभीर मुद्दा पूंजीगत संरचना का है। जहाँ नियम के अनुसार ₹200 करोड़ की पेड-अप कैपिटल होनी चाहिए थी, वहीं चेन्नई SCL के पास केवल ₹10 लाख थे। इसके अलावा, बायोगैस प्लांट और विल्लिवाक्कम टैंक जैसे प्रोजेक्ट्स के लिए आवश्यक वैधानिक मंजूरियां भी प्राप्त नहीं की गई थीं।

विवरण मूल योजना / नियम वास्तविक स्थिति (CAG रिपोर्ट)
कुल नियोजित प्रोजेक्ट्स 48 (₹1,366.25 Cr) 8 प्रोजेक्ट्स लागू नहीं हुए (₹279.03 Cr)
परियोजना क्षेत्र ABD ज़ोन के भीतर 13 प्रोजेक्ट्स ज़ोन के बाहर लागू
पेड-अप कैपिटल ₹200 करोड़ केवल ₹10 लाख
क्या आप जानते हैं?: स्मार्ट सिटी मिशन का उद्देश्य डेटा और तकनीक के माध्यम से शहरी जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है, लेकिन प्रशासनिक विफलताएं अक्सर इसे केवल 'सौंदर्यीकरण' तक सीमित कर देती हैं।

Frequently Asked Questions

1. CAG रिपोर्ट में किन प्रमुख प्रोजेक्ट्स के छूटने का जिक्र है?
मुख्य रूप से स्ट्रीट लाइट मॉनिटरिंग सिस्टम (₹248.47 करोड़) और इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (₹100 करोड़) को बिना किसी ठोस कारण के छोड़ दिया गया।

p>2. फंड का दुरुपयोग किस प्रकार किया गया?
प्रशासनिक फंड से ₹16.23 करोड़ का विचलन किया गया, जिसका उपयोग विज्ञापनों और गैर-स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स के लिए किया गया।