कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने असम सरकार की वेबसाइट से काजीरंगा के एनिमल कॉरिडोर से संबंधित गजट अधिसूचना को हटाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं, इसे दुर्लभ खनिजों से जुड़ा कवर-अप बताया है।
- सांसद गौरव गोगोई का आरोप है कि काजीरंगा एनिमल कॉरिडोर पर 2022 की गजट अधिसूचना अधूरी थी और बाद में उसे सरकारी पोर्टल से हटा दिया गया।
- ऑनलाइन वर्जन से 'पनबारी कॉरिडोर' गायब था, जिसका संबंध दुर्लभ खनिज तत्वों (Rare Earth Elements) की रिपोर्ट और एक चाय बागान की बिक्री से जोड़ा जा रहा है।
- यह कॉरिडोर बाढ़ के दौरान जानवरों के कार्बी आंगलों पहाड़ियों तक पहुंचने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
असम कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद गौरव गोगोई ने असम सरकार द्वारा अपनी आधिकारिक वेबसाइट से काजीरंगा नेशनल पार्क के एनिमल कॉरिडोर से संबंधित 2022 की एक कथित अधूरी गजट अधिसूचना को हटाने पर सवाल खड़े किए हैं। यह विवाद मुख्य रूप से पनबारी वन्यजीव कॉरिडोर के विवरण गायब होने को लेकर है, जो नौ महत्वपूर्ण गलियारों में से एक है।
श्री गोगोई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि काजीरंगा नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व की वेबसाइट पर पूर्ण अधिसूचना पृष्ठ 1,328 से 1,455 तक है। हालांकि, राज्य पोर्टल पर प्रकाशित संस्करण पृष्ठ 1,426 पर ही रुक गया, जिससे पनबारी कॉरिडोर को कवर करने वाले 29 पृष्ठ गायब हो गए। गोगोई ने आरोप लगाया कि यह चूक उसी समय हुई जब इस क्षेत्र में दुर्लभ खनिज तत्वों (Rare Earth Elements) के जमाव की खबरें आईं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक लिपिकीय त्रुटि नहीं बल्कि एक रणनीतिक चूक हो सकती है। पनबारी कॉरिडोर उस क्षेत्र में स्थित है जहाँ दुर्लभ खनिजों के भंडार होने की बात कही गई है। इसके अलावा, मेथोनी टी एस्टेट, जो इसी कॉरिडोर के अंतर्गत आता है, को 2022 में RCP सॉल्यूशंस एंड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा अधिग्रहित किया गया था, जो रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। अधिसूचना से कॉरिडोर का गायब होना और कॉर्पोरेट अधिग्रहण का समय एक ही होना गंभीर संदेह पैदा करता है।
सार्वजनिक रिकॉर्ड से महत्वपूर्ण पारिस्थितिक गलियारों को जानबूझकर हटाना संवेदनशील बायोस्फीयर रिजर्व में अवैध भूमि परिवर्तन और औद्योगिक अतिक्रमण का रास्ता खोलता है।
पहचाने गए नौ कॉरिडोर—अमगुरी, बागोरी, चिरंग, देओसुर, हल्दीबाड़ी, हरमती, हाथीडांडी, कंचनजुरी और पनबारी—काजीरंगा के मैदानों को कार्बी आंगलों की पहाड़ियों से जोड़ते हैं। ये पहाड़ियाँ जानवरों के लिए तब शरणस्थली बनती हैं जब वार्षिक मानसून बाढ़ के दौरान पार्क जलमग्न हो जाता है। इन गलियारों को अधिसूचित करने में देरी वन्यजीवों के लिए बड़ा खतरा है।
श्री गोगोई ने राज्य सरकार पर प्रणालीगत लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार पार्क के पास लग्जरी होटलों के लिए MoU साइन कर रही है और अवैध खनन के प्रति उदासीन है। उन्होंने भूमि अधिकार कार्यकर्ता प्रणब डोले की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तारी का भी जिक्र किया, जिन्होंने स्वदेशी किसानों के खेतों पर होटल परियोजना का विरोध किया था।
| विशेषता | पूर्ण गजट अधिसूचना | राज्य पोर्टल संस्करण |
|---|---|---|
| कुल पृष्ठ | पृष्ठ 1,455 तक | पृष्ठ 1,426 पर समाप्त |
| पनबारी कॉरिडोर | शामिल (विस्तृत मानचित्र सहित) | गायब (29 पृष्ठ कम) |
| स्थिति | आधिकारिक रिकॉर्ड | वेबसाइट से हटा दिया गया |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: पनबारी कॉरिडोर विशेष रूप से विवादित क्यों है?
इसका संबंध दुर्लभ खनिजों की रिपोर्ट और रिलायंस इंडस्ट्रीज की सहायक कंपनी द्वारा चाय बागान के अधिग्रहण से है, जिससे संदेह है कि औद्योगिक उपयोग के लिए इसे रिकॉर्ड से हटाया गया।
प्रश्न 2: यदि कॉरिडोर अवरुद्ध हो जाते हैं तो जानवरों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
जानवर बाढ़ के दौरान पहाड़ियों तक नहीं पहुंच पाते, जिससे उनकी मृत्यु दर बढ़ती है और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ जाती हैं।