मंडी की सांसद कंगना रनौत ने विकास निधि के उपयोग में भारी विसंगतियों को लेकर अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एक वायरल वीडियो में उन्हें सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर पर सवाल उठाते देखा जा सकता है।
- मंडी सांसद कंगना रनौत ने ₹11 करोड़ के विकास फंड में भारी विसंगतियों का आरोप लगाया।
- अधिकारियों के अनुसार 90% फंड खर्च हो चुका है, जबकि जमीनी स्तर पर केवल ₹50 लाख का काम दिखा।
- सांसद ने 30-40% फंड के गबन की आशंका जताई और अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी।
हिमाचल प्रदेश के मंडी संसदीय क्षेत्र में विकास कार्यों की समीक्षा के लिए आयोजित जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (DISC) की बैठक में भारी हंगामा देखने को मिला। बैठक की अध्यक्षता कर रही सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने क्षेत्र विकास निधि (MPLAD) के उपयोग में बरती गई लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों की जमकर क्लास ली।
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो में कंगना रनौत अधिकारियों से सीधे सवाल करती नजर आ रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके निर्वाचन क्षेत्र के लिए लगभग ₹11 करोड़ आवंटित किए गए थे। जब उन्होंने खर्च का विवरण मांगा, तो अधिकारियों ने दावा किया कि इस राशि का 90 प्रतिशत हिस्सा खर्च किया जा चुका है। हालांकि, कंगना ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वास्तविक धरातल पर केवल ₹50 लाख के कार्य ही दिखाई दे रहे हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this confrontation highlights a deep-rooted systemic friction between political representatives and the permanent bureaucracy in Himachal Pradesh. When a high-profile MP like Kangana Ranaut publicly exposes a gap between 'paper expenditure' and 'ground reality', it puts immense pressure on the state administration to ensure transparency in the MPLAD funds, which are crucial for grassroots infrastructure.
"The discrepancy between official accounting and physical progress in constituency funds often points toward systemic leakage or poor project management."
कंगना ने आगे आरोप लगाया कि कुछ जांच एजेंसियों ने संकेत दिए हैं कि इस निधि का लगभग 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है और गलत हाथों में चला गया है। उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि अधिकारी इस राशि को रिकवर करने में विफल रहे हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राष्ट्रीय मीडिया और आम जनता सोशल मीडिया के माध्यम से अधूरे प्रोजेक्ट्स को लेकर उनकी आलोचना कर रहे हैं, जबकि असल गलती प्रशासनिक विफलता है।
सांसद ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जनता अब जागरूक है और सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर सवाल पूछ रही है। उन्होंने निर्देश दिया कि लंबित सभी परियोजनाओं को तत्काल पूरा किया जाए और जनता के पैसे का ईमानदारी से उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
Frequently Asked Questions
1. कंगना रनौत ने अधिकारियों पर क्या आरोप लगाया?
उन्होंने आरोप लगाया कि ₹11 करोड़ के फंड में से कागजों पर 90% खर्च दिखाया गया है, जबकि असल में केवल ₹50 लाख का काम हुआ है।
2. इस विवाद का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारण विकास निधि के उपयोग में पारदर्शिता की कमी और जमीनी स्तर पर परियोजनाओं का पूरा न होना है।