देहरादून के दून अस्पताल में लगभग 600 पीजी डॉक्टरों और इंटर्न ने कम स्टाइपेंड और अत्यधिक कार्यभार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। डॉक्टरों ने वेतन वृद्धि की मांग करते हुए कार्यप्रणाली में सुधार की अपील की है।

  • 600 पीजी डॉक्टरों और एमबीबीएस इंटर्न द्वारा वेतन वृद्धि के लिए विरोध प्रदर्शन।
  • इंटर्न ने 17,000 से 30,000 रुपये और पीजी डॉक्टरों ने 70,000 से 1 लाख रुपये स्टाइपेंड की मांग की।
  • डॉक्टरों ने 12 घंटे से अधिक की थकाऊ शिफ्ट और मानसिक तनाव का मुद्दा उठाया।

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित दून अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं के स्तंभ माने जाने वाले युवा डॉक्टरों ने प्रशासन के खिलाफ विद्रोह कर दिया है। लगभग 600 स्नातकोत्तर (PG) डॉक्टरों और एमबीबीएस इंटर्न ने अस्पताल परिसर में एकत्रित होकर अपने मासिक स्टाइपेंड में वृद्धि की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। डॉक्टरों का आरोप है कि उन्हें अत्यधिक कार्यभार दिया जा रहा है, लेकिन उनके वेतन में लंबे समय से कोई सुधार नहीं किया गया है।

प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि वे अक्सर 12 घंटे से अधिक कीgruelling शिफ्ट में काम करते हैं। तनावपूर्ण परिस्थितियों और संसाधनों की कमी के बीच मरीजों की भारी भीड़ को संभालना उनके लिए मानसिक और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो गया है। इंटर्न डॉक्टरों की मांग है कि उनके वर्तमान स्टाइपेंड को 17,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये किया जाए, जबकि पीजी डॉक्टरों ने इसे 70,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये करने की मांग की है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that this protest is not merely about money, but about the systemic failure of the healthcare infrastructure in hill states. When the primary caregivers are underpaid and overworked, the quality of patient care inevitably declines. This movement reflects a growing trend of medical professionals demanding parity with neighboring states like Uttar Pradesh and Madhya Pradesh, where stipends are significantly higher.

"The disparity in medical stipends across state lines creates a brain drain and severe burnout among young doctors who are the backbone of emergency care."

ऐतिहासिक रूप से, उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में डॉक्टरों की भारी कमी रही है। ऐसे में जब मौजूदा डॉक्टर ही असंतुष्ट होंगे, तो ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और भी बदतर हो सकती है। डॉक्टरों का तर्क है कि उनकी योग्यता और कार्य के घंटों के अनुपात में वर्तमान वेतन अत्यंत कम है।

श्रेणीवर्तमान स्टाइपेंड (रु)मांग किया गया स्टाइपेंड (रु)
MBBS इंटर्न17,00030,000
PG डॉक्टर70,0001,00,000
क्या आप जानते हैं?: भारत के कई राज्यों में रेजिडेंट डॉक्टरों के कार्य घंटे अंतरराष्ट्रीय मानकों से कहीं अधिक हैं, जिससे उनमें 'बर्नआउट' की समस्या आम हो गई है।

Frequently Asked Questions

1. डॉक्टर किस बात के लिए विरोध कर रहे हैं?
डॉक्टर अपने मासिक स्टाइपेंड में वृद्धि और 12 घंटे से अधिक की कठिन शिफ्टों में सुधार की मांग कर रहे हैं।

2. अन्य राज्यों से तुलना क्यों की जा रही है?
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों में स्टाइपेंड की दरें अधिक हैं, जिससे उत्तराखंड के डॉक्टरों में असंतोष है।