मेघालय उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के छह छात्रों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (FIR) को रद्द कर दिया है, जिन्होंने शिलॉन्ग के एक होमस्टे में तोड़फोड़ की थी। यह फैसला मुआवजे के भुगतान और सामुदायिक सेवा के आदेश के बाद आया है।
- छात्रों द्वारा होमस्टे मालिक को ₹2.06 लाख का हर्जाना देने के बाद FIR रद्द।
- दो वयस्क छात्रों को ₹25,000 अतिरिक्त भुगतान और सामुदायिक सेवा का आदेश।
- अदालत ने छात्रों के भविष्य और करियर को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया।
मेघालय उच्च न्यायालय ने मुख्य न्यायाधीश रेवती मोहिते डेरे की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश के छह छात्रों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (FIR) को रद्द कर दिया है। यह मामला शिलॉन्ग के एक होमस्टे में तोड़फोड़ से जुड़ा था। यह कानूनी प्रक्रिया 11 जुलाई को शुरू हुई थी, जब लतुमखराह पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई थी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, विवाद तब शुरू हुआ जब होमस्टे मैनेजर ने एक कमरे में अतिरिक्त मेहमानों को रुकने की अनुमति नहीं दी, जिसके बाद छात्रों ने संपत्ति को नुकसान पहुँचाया और मैनेजर को धमकी दी। आरोपियों में तीन नाबालिग (15-17 वर्ष), एक 18 वर्षीय और दो 20-25 वर्ष के छात्र शामिल थे, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। इन्हें 13 जुलाई को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया गया था।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह निर्णय दंडात्मक कार्रवाई और सुधारात्मक न्याय के बीच संतुलन बनाने की न्यायिक प्रवृत्ति को दर्शाता है। अदालत ने यह सुनिश्चित किया है कि युवाओं की एक क्षणिक गलती उनके शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य को स्थायी रूप से बर्बाद न करे, लेकिन साथ ही उन्हें उनकी गलती का एहसास भी कराया।
17 अगस्त को हुए समझौते के तहत, छात्रों ने होमस्टे मालिक को ₹2.06 लाख का पूर्ण मुआवजा दिया और बिना शर्त माफी मांगी। हालांकि, अदालत का मानना था कि केवल आर्थिक भुगतान वयस्क अपराधियों के लिए पर्याप्त सबक नहीं है।
"न्यायपालिका अब युवाओं में सामाजिक जवाबदेही पैदा करने के लिए केवल जेल भेजने के बजाय सामुदायिक सेवा जैसे सुधारात्मक उपायों की ओर बढ़ रही है।"
इसीलिए, अदालत ने दो वयस्क छात्रों को एक सप्ताह के भीतर मालिक को ₹25,000 अतिरिक्त देने का निर्देश दिया। साथ ही, उन्हें छह दिनों की सामुदायिक सेवा करने को कहा गया है। इनमें से तीन दिन शिलॉन्ग के सिख सेंटर श्री गुरु सिंह सभा में और शेष तीन दिन जीवा केयर्स के 'प्रोजेक्ट ऑपरेशन क्लीन-अप' के साथ उमखराह नदी की सफाई और शहर के रख-रखाव में बिताने होंगे।
उम्र के कारण अन्य चार छात्रों को सामुदायिक सेवा से छूट दी गई है। अदालत ने लोक अभियोजक के माध्यम से इस सेवा के संतोषजनक समापन की रिपोर्ट मांगी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: FIR क्यों रद्द की गई?
FIR इसलिए रद्द की गई क्योंकि छात्रों ने होमस्टे मालिक के साथ वित्तीय समझौता कर लिया था और मालिक ने कोई आपत्ति (No-objection) नहीं जताई।
प्रश्न 2: छात्रों को कौन सी सामुदायिक सेवा करनी होगी?
उन्हें सिख सेंटर श्री गुरु सिंह सभा में सेवा देनी होगी और जीवा केयर्स के माध्यम से उमखराह नदी की सफाई अभियान में भाग लेना होगा।