पलनाडु जिला कलेक्टर कृतिका शुक्ला ने NH-167-A नरसारोपेट बाईपास के लिए भूमि अधिग्रहण कार्य पूरा होने की घोषणा की है, जिससे क्षेत्रीय यातायात में बड़ी राहत मिलेगी।

  • NH-167-A नरसारोपेट बाईपास मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद।
  • 14 गांवों में भूमि अधिग्रहण पूरा; 90% जमीन NHAI को सौंपी गई।
  • 'अभ्युदयम' पहल के तहत 30 प्रसंस्करण और विनिर्माण इकाइयां स्थापित होंगी।
  • पिछले एक वर्ष में 43,000 से अधिक सार्वजनिक शिकायतों का समाधान।

क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट में, पलनाडु जिला कलेक्टर कृतिका शुक्ला ने घोषणा की है कि NH-167-A नरसारोपेट बाईपास रोड का काम मार्च 2027 तक पूरा होने की संभावना है। यह घोषणा भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद एक बड़े मील के पत्थर के रूप में देखी जा रही है।

पदभार संभालने के एक वर्ष पूरे होने पर बोलते हुए, सुश्री शुक्ला ने बताया कि सभी 14 प्रभावित गांवों में भूमि अधिग्रहण पुरस्कारों की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। लगभग 90% भूमि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को सौंपी जा चुकी है, जिससे अब निविदा (टेंडर) प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है।

यह परियोजना पिछले तीन वर्षों से अदालती मामलों और प्रभावित किसानों के विरोध के कारण रुकी हुई थी। इसके पूरा होने से अमरावती और नरसारोपेट के बीच कनेक्टिविटी में जबरदस्त सुधार होगा, जिससे यात्रा के समय में कमी आएगी और नरसारोपेट शहर में यातायात की भीड़ कम होगी।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस बाईपास का पूरा होना केवल परिवहन सुधार नहीं है, बल्कि एक रणनीतिक आर्थिक उत्प्रेरक है। भारी यातायात को शहर के केंद्र से हटाकर, स्थानीय अर्थव्यवस्था को व्यवस्थित शहरी विकास की ओर मोड़ा जा सकता है। इसके अलावा, स्वर्ण आंध्र-2047 लक्ष्यों के साथ इसका तालमेल ग्रामीण केंद्रों को प्रशासनिक राजधानियों से जोड़ने की राज्य की व्यापक रणनीति को दर्शाता है।

पलनाडु में लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवादों का समाधान आंध्र प्रदेश में बुनियादी ढांचे के निष्पादन के लिए एक मिसाल कायम करता है।

बुनियादी ढांचे के अलावा, कलेक्टर ने 'अभ्युदयम' (एक परिवार, एक उद्यमी) कार्यक्रम पर प्रकाश डाला। इस पहल का उद्देश्य 28 मंडलों में आजीविका समूहों की पहचान कर आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। लाल मिर्च, अरहर, डेयरी और हल्दी जैसे स्थानीय उत्पादों के लिए 30 प्रसंस्करण इकाइयों के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं।

प्रशासनिक दक्षता पर भी जोर दिया गया, जिसके तहत 52,872 शिकायतों में से 43,648 का समाधान किया गया। इसके साथ ही, मेगा क्रेडिट आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से 1.03 लाख लाभार्थियों को ₹3,216 करोड़ का ऋण प्रदान किया गया।

क्या आप जानते हैं?: अमरावती सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ने 96.17% के प्रभावशाली स्कोर के साथ राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानकों (NQAS) के तहत राज्य में पांचवां स्थान हासिल किया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: नरसारोपेट बाईपास पूरी तरह से कब चालू होगा?
इस परियोजना के मार्च 2027 तक पूरा होने और यातायात के लिए खुलने की उम्मीद है।

प्रश्न 2: 'अभ्युदयम' पहल क्या है?
यह पलनाडु जिले का एक कार्यक्रम है जिसे आजीविका समूहों का समर्थन करके और प्रसंस्करण इकाइयों के लिए ऋण प्रदान करके उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए डिजाइन किया गया है।