जिला निर्वाचन अधिकारी और कलेक्टर एस. कंदासामी ने इरोड में ईवीएम और वीवीपीएटी मशीनों के सुरक्षित भंडारण की जांच की। इस निरीक्षण में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

  • जिला कलेक्टर एस. कंदासामी ने ईवीएम और वीवीपीएटी भंडारण केंद्र का निरीक्षण किया।
  • निरीक्षण के दौरान राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति सुनिश्चित की गई।
  • सीसीटीवी निगरानी और स्टॉक रजिस्टरों की गहन जांच की गई।

तमिलनाडु के इरोड में चुनावी पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। मंगलवार (8 सितंबर, 2026) को जिला निर्वाचन अधिकारी और कलेक्टर एस. कंदासामी ने इरोड राजस्व मंडल अधिकारी (RDO) के कार्यालय परिसर में स्थित इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और वोटर वेरिफ़िएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) भंडारण सुविधा का त्रैमासिक निरीक्षण किया।

इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा निर्धारित नियमों और दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन किया जा रहा है या नहीं। कलेक्टर ने व्यक्तिगत रूप से भंडारण कक्ष का दौरा किया और वहां रखी मशीनों की भौतिक स्थिति की जांच की। उन्होंने स्टॉक विवरणों का मिलान किया और यह सुनिश्चित किया कि इन्वेंट्री से संबंधित रजिस्टर पूरी तरह से अद्यतित (updated) हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, ईवीएम और वीवीपीएटी जैसी संवेदनशील मशीनों का नियमित निरीक्षण केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता के विश्वास को बनाए रखने का एक तरीका है। राजनीतिक दलों की उपस्थिति यह प्रमाणित करती है कि मशीनों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है।

चुनाव मशीनों की सुरक्षा और उनकी निगरानी का पारदर्शी होना किसी भी निष्पक्ष चुनाव की आधारशिला है।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने विशेष रूप से सीसीटीवी निगरानी प्रणाली और निगरानी उपकरणों वाले कमरे की जांच की। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि निगरानी तंत्र 24x7 सक्रिय है और सुरक्षा में कोई चूक नहीं है। इस अवसर पर इरोड राजस्व मंडल अधिकारी मुथुसामी, तहसीलदार (चुनाव) Shanmugasundaram और विभिन्न मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में ईवीएम का उपयोग 2004 से सभी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में किया जा रहा है। वीवीपीएटी (VVPAT) को बाद में जोड़ा गया ताकि मतदाता यह देख सकें कि उनका वोट सही उम्मीदवार को गया है। चुनाव आयोग इन मशीनों के भंडारण के लिए 'स्ट्रांग रूम' प्रोटोकॉल का पालन करता है, जिसमें द्वि-स्तरीय लॉक और निरंतर सीसीटीवी निगरानी अनिवार्य है।

क्या आप जानते हैं?: ईवीएम मशीनें 'स्टैंडअलोन' होती हैं, जिसका अर्थ है कि वे इंटरनेट या किसी भी बाहरी नेटवर्क से नहीं जुड़ी होती हैं, जिससे उन्हें हैक करना असंभव हो जाता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: त्रैमासिक निरीक्षण क्यों किया जाता है?
उत्तर: यह सुनिश्चित करने के लिए कि मशीनें सुरक्षित हैं, उनके रिकॉर्ड सही हैं और भंडारण सुविधा में कोई तकनीकी या सुरक्षा खामी नहीं है।

प्रश्न 2: निरीक्षण में राजनीतिक दलों की भूमिका क्या होती है?
उत्तर: राजनीतिक दलों की उपस्थिति यह सुनिश्चित करती है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है और मशीनों के रखरखाव में किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है।