सेलम कॉर्पोरेशन के निर्वाचित प्रतिनिधियों ने आधिकारिक सरकारी पोर्टल पर अपने नाम और फोन नंबर तत्काल बहाल करने की मांग की है, और इसे जनता से उन्हें अलग करने का प्रयास बताया है।
- सेलम कॉर्पोरेशन ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट से 60 वार्ड पार्षदों के नाम, फोटो और फोन नंबर हटा दिए हैं।
- सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षदों का आरोप है कि इस कदम से जनता की अपने प्रतिनिधियों तक पहुंच बाधित हुई है।
- वेबसाइट पर अभी भी उन अधिकारियों के नाम दिख रहे हैं जिनका तबादला अन्य जिलों में हो चुका है।
तमिलनाडु में राजनीतिक तनाव पैदा करने वाले एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में, सेलम कॉर्पोरेशन अपनी आधिकारिक वेबसाइट (www.salemcorporation.gov.in) से सभी 60 वार्ड पार्षदों के संपर्क विवरण और फोटो हटाने के कारण विवादों में घिर गया है। यह डेटा, जिसने पहले नागरिकों को उनके स्थानीय प्रतिनिधियों से आसानी से जुड़ने में मदद की थी, कथित तौर पर दो महीने पहले बिना किसी स्पष्ट कारण के हटा दिया गया।
यह विवाद तब और गहरा गया जब यह पता चला कि यह कार्रवाई केवल पार्षदों तक सीमित नहीं थी। सिटी मेयर और कॉर्पोरेशन कमिश्नर की तस्वीरें और विवरण भी हटा दिए गए। प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा उदाहरण यह है कि वेबसाइट पर अभी भी पूर्व कमिश्नर एम. एलानगोवन और अन्य अधिकारियों के नाम प्रदर्शित हैं, जिनका तबादला काफी समय पहले अन्य जिलों में हो चुका है, जिससे यह पोर्टल सार्वजनिक उपयोग के लिए बेकार हो गया है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि डिजिटल गवर्नेंस के दौर में, आधिकारिक वेबसाइट नागरिक और राज्य के बीच प्राथमिक सेतु का काम करती है। सीधे संपर्क माध्यमों को हटाकर, सेलम कॉर्पोरेशन ने प्रभावी रूप से एक संचार शून्य (communication vacuum) पैदा कर दिया है। यह केवल एक तकनीकी खराबी नहीं है, बल्कि एक प्रणालीगत विफलता है जो पहुंच की लोकतांत्रिक भावना को कमजोर करती है। जब नागरिक अपने प्रतिनिधियों को ऑनलाइन नहीं खोज पाते, तो स्थानीय सरकार की जवाबदेही कम हो जाती है।
सार्वजनिक पोर्टल से निर्वाचित अधिकारियों के डेटा को हटाना शहरी शासन में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक पहुंच पर सीधा प्रहार है।
डीएमके पार्षद एसन डी. एलानगो (वार्ड 34) ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि यह कदम मतदाताओं का अपमान है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि युवा पीढ़ी, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निर्भर है, अब अपने प्रतिनिधियों से संपर्क नहीं कर पा रही है। श्री एलानगो ने प्रशासन की विसंगतियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि तिरुचि कॉर्पोरेशन और कोयंबटूर कॉर्पोरेशन की वेबसाइटें अपने अधिकारियों के विवरण प्रदर्शित कर पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखती हैं।
दबाव बढ़ाते हुए, सेलम कॉर्पोरेशन के विपक्ष के नेता एन. यादवमूर्ति (AIADMK) ने कहा कि जनता के प्रतिनिधियों के नाम हटाना अस्वीकार्य है क्योंकि यह जनता के अपने नेताओं तक पहुंचने के अधिकार का उल्लंघन है। विपक्ष अब इस बात की जांच की मांग कर रहा है कि किस अधिकारी के आदेश पर यह डेटा हटाया गया।
बढ़ते आक्रोश के जवाब में, सेलम कॉर्पोरेशन के मेयर ए. रामचंद्रन ने कहा है कि वह इस मामले की जांच करेंगे, हालांकि डेटा की बहाली के लिए कोई समय सीमा नहीं बताई गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: इस समस्या से कौन सी वेबसाइट प्रभावित है?
सेलम कॉर्पोरेशन की आधिकारिक वेबसाइट (www.salemcorporation.gov.in) से पार्षद निर्देशिका हटा दी गई है।
प्रश्न 2: पार्षद विरोध क्यों कर रहे हैं?
उनका तर्क है कि संपर्क विवरण हटाने से नागरिक उन तक नहीं पहुंच पा रहे हैं और यह मतदाताओं द्वारा उन्हें दिए गए लोकतांत्रिक जनादेश का अपमान है।