दिल्ली के सत्य निकेतन में बिल्डिंग गिरने से हुई मौत के बाद चंदौली के छात्र अभिषेक खरवार के पिता ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पीजी संचालकों की मनमानी और छात्रों की सुरक्षा को लेकर सरकार से जवाब मांगा है।

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  • दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे में चंदौली के 20 वर्षीय छात्र अभिषेक खरवार की जान गई।
  • पिता ने पीजी संचालकों द्वारा 11 महीने की एडवांस फीस लेने और खराब खाने की शिकायत की।
  • हादसे के बाद निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर सवाल उठे हैं।

दिल्ली के सत्य निकेतन में हुई भीषण बिल्डिंग त्रासदी ने एक और हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। इस हादसे में जान गंवाने वाले सात लोगों में उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के निवासी 20 वर्षीय छात्र अभिषेक खरवार भी शामिल थे। मंगलवार को जब अभिषेक का पार्थिव शरीर वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पहुंचा, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।

अभिषेक, जो बीकॉम सेकंड ईयर का छात्र था और भविष्य में MBA करने का सपना देख रहा था, 2025 में बड़े अरमानों के साथ दिल्ली आया था। उसके पिता, संतोष खरवार, जो पेशे से एक इंजीनियर हैं, ने अपने बेटे को खोने के बाद न केवल अपना दुख व्यक्त किया, बल्कि दिल्ली में छात्रों के रहने की व्यवस्था और पीजी (PG) संचालकों की कार्यप्रणाली पर भी तीखे सवाल खड़े किए हैं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि दिल्ली जैसे महानगरों में छात्रों की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा बन गई है। पीजी संचालकों द्वारा अग्रिम भुगतान (Advance Payment) की मांग और निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन न करना छात्रों के जीवन को खतरे में डाल रहा है। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि नियामक संस्थाओं की विफलता का प्रतीक है।

'माता-पिता अपने बच्चों को पाल-पोसकर बड़ा करते हैं, लेकिन व्यवस्था की लापरवाही उन्हें उम्र भर का दर्द दे जाती है।'

संतोष खरवार ने बताया कि अभिषेक के पीजी का किराया 13,000 रुपये प्रति माह था, जिसके बावजूद वहां खाने की गुणवत्ता बेहद खराब थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पीजी संचालक छात्रों से 11 महीने की फीस एडवांस में ले लेते हैं, जिससे छात्र खराब सुविधाओं के बावजूद वहां रहने को मजबूर होते हैं। यदि वे बीच में छोड़ना चाहें, तो उनका पैसा डूबने का डर रहता है।

हादसे के समय बिल्डिंग में निर्माण कार्य चल रहा था, जिस पर पिता ने सवाल उठाया कि छात्रों को सुरक्षित स्थान पर क्यों नहीं भेजा गया? उन्होंने दिल्ली सरकार और प्रशासन से मांग की है कि पीजी और हॉस्टल का नियमित ऑडिट किया जाए ताकि भविष्य में किसी और मासूम की जान न जाए।

Did You Know?: दिल्ली में छात्र बड़ी संख्या में पीजी और हॉस्टल में रहते हैं, लेकिन सुरक्षा ऑडिट की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: सत्य निकेतन हादसा क्या था?
उत्तर: दिल्ली के सत्य निकेतन में एक बिल्डिंग गिरने से सात लोगों की मौत हो गई थी, जिसमें पांच छात्र शामिल थे।

प्रश्न 2: मृतक छात्र कहाँ का रहने वाला था?
उत्तर: मृतक अभिषेक खरवार उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के झांसी गांव का रहने वाला था।